Teacher Maternity Leave Case; Supreme Court | Madras HC | सुप्रीम कोर्ट बोला- मैटरनिटी लीव प्रजनन अधिकारों का हिस्सा: मद्रास हाईकोर्ट का फैसला खारिज; HC ने तीसरे बच्चे के लिए छुट्‌टी देने से इनकार किया था

Actionpunjab
3 Min Read


नई दिल्ली7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
फोटो AI जनरेटेड है। - Dainik Bhaskar

फोटो AI जनरेटेड है।

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया है , जिसमें एक सरकारी शिक्षिका को उसके तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मैटरनिटी लीव देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि स्टेट पॉलिसी के मुताबिक मैटरनिटी लीव का फायदा केवल दो बच्चों तक ही सीमित है।

जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा, “हमने प्रजनन अधिकारों की अवधारणा पर गहनता से विचार किया है और माना है कि मातृत्व लाभ प्रजनन अधिकारों का एक हिस्सा है। इसलिए, विवादित आदेश को रद्द कर दिया गया है।”

महिला की याचिका में था- पहले 2 बच्चों के समय लीव नहीं ली थी

महिला ने अपनी याचिका में कहा कि उसे अब मैटरनिटी लीव नहीं दी जा रही है, क्योंकि उसकी पहली शादी से दो बच्चे हैं। हालांकि, महिला ने अपनी पहली शादी से पैदा हुए दो बच्चों के लिए कोई लाभ नहीं लिया था। उसने अपनी दूसरी शादी के बाद सरकारी नौकरी जॉइन की। शादी के बाद वह गर्भवती हो गई। इसलिए उसने लीव के लिए आवेदन किया था।

तमिलनाडु में क्या है मैटरनिटी लीव का नियम

तमिलनाडु में नियम है कि मैटरनिटी लीव का लाभ किसी महिला को केवल पहले दो बच्चों के लिए ही मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन करते हुए छुट्टी को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया था। सभी महिला कर्मचारियों को दो बच्चों के लिए मातृत्व अवकाश मिलेगा। इसी तरह, बच्चे गोद लेने वाली महिलाएं भी 12 सप्ताह की लीव ले सकती हैं।

ये खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट में याचिका-ऑनलाइन सट्‌टेबाजी को बढ़ावा दिया जा रहा: एक्टर-क्रिकेटर भी शामिल; कोर्ट बोला- कोई कानून जुआ खेलने से नहीं रोक सकता

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लोग इंडियन प्रीमियर लीग की आड़ में सट्टा लगा रहे हैं और जुआ खेल रहे हैं। हम जानते हैं कि इसे रोका जाना चाहिए, लेकिन शायद आप इस गलतफहमी में हैं कि इसे कानून के जरिए रोका जा सकता है। कोर्ट ऑनलाइन ऐप को रेगुलेट करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “जिस तरह हम लोगों को हत्या करने से नहीं रोक सकते, उसी तरह कोई कानून लोगों को सट्टेबाजी और जुआ खेलने से नहीं रोक सकता। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *