Uddhav Thackeray Raj Thackeray Matoshree Visit Update | Shiv Sena MNS Alliance | राज ठाकरे 6 साल बाद उद्धव के घर पहुंचे: जन्मदिन की बधाई दी; 22 दिन पहले दोनों एक मंच पर थे, ऐसा 20 साल बाद हुआ था

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मुंबई39 मिनट पहले

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उद्धव ठाकरे का आज 65वां जन्मदिन है। इसी मौके पर राज उन्हें बधाई देने मातोश्री पहुंचे। - Dainik Bhaskar

उद्धव ठाकरे का आज 65वां जन्मदिन है। इसी मौके पर राज उन्हें बधाई देने मातोश्री पहुंचे।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) चीफ राज ठाकरे रविवार को 6 साल बाद उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री पहुंचे। इस दौरान राज ने शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे को गले लगाया और बुके देकर जन्मदिन की बधाई दी।

इससे पहले आखिरी बार 6 साल पहले 2019 में राज ठाकरे मातोश्री गए थे। उन्होंने उद्धव परिवार को अपने बेटे अमित की शादी में आने का न्योता दिया था। वहीं, औपचारिक रूप से राज 2012 में मातोश्री गए थे। उस समय बालासाहेब ठाकरे बीमार थे।

5 जुलाई को 20 साल बाद उद्धव और राज मुंबई के वर्ली डोम में एक रैली के दौरान साथ नजर आए थे। इस मौके पर दोनों की तरफ से आगे साथ मिलकर राजनीति करने के संकेत दिए गए थे। उद्धव को शिवसेना का मुखिया बनाने के बाद राज ने अलग पार्टी MNS बनाई थी। तब दोनों के रिश्ते अच्छे नहीं थे।

उद्धव-राज ठाकरे के मुलाकात की 4 फोटोज…

उद्धव ठाकरे का आज 65वां जन्मदिन है। इस मौके पर राज ठाकरे उन्हें बधाई देने मातोश्री पहुंचे।

उद्धव ठाकरे का आज 65वां जन्मदिन है। इस मौके पर राज ठाकरे उन्हें बधाई देने मातोश्री पहुंचे।

MNS चीफ राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को बुके दिया। इस मौके पर दोनों नेता मुस्कुराते नजर आए।

MNS चीफ राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को बुके दिया। इस मौके पर दोनों नेता मुस्कुराते नजर आए।

उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे को गले लगाया। दोनों नेता 2019 के बाद मातोश्री में मिले हैं।

उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे को गले लगाया। दोनों नेता 2019 के बाद मातोश्री में मिले हैं।

MNS नेता नितिन सरदेसाई, शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत (बाएं से दूसरे), अनिल परब और अम्बादास दानवे भी मातोश्री में मौजूद रहे।

MNS नेता नितिन सरदेसाई, शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत (बाएं से दूसरे), अनिल परब और अम्बादास दानवे भी मातोश्री में मौजूद रहे।

20 साल बाद ठाकरे परिवार एक साथ आया था

महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी एकता’ पर 5 जुलाई को मुंबई के वर्ली डोम में रैली की थी। इस मौके पर दोनों की तरफ से आगे साथ मिलकर राजनीति करने के संकेत दिए गए।

राज ठाकरे ने कहा था, ‘मैंने अपने इंटरव्यू में कहा था कि झगड़े से बड़ा महाराष्ट्र है। 20 साल बाद हम एक मंच पर आए हैं आपको दिख रहे हैं। हमारे लिए सिर्फ महाराष्ट्र और मराठी एजेंडा है, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।’

वहीं, उद्धव ने कहा था-​​​​​​, ‘हमारे बीच की दूरियां जो मराठी ने दूर कीं सभी को अच्छी लग रही हैं। मेरी नजर में, हमारा एक साथ आना और यह मंच साझा करना, हमारे भाषण से कहीं ज्यादा अहम है।’ पूरी खबर पढ़ें..

अब जानिए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच फूट कैसे पड़ी थी

1989 में राज ठाकरे 21 साल की उम्र में शिवसेना की स्टूडेंट विंग, भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष थे। राज इतने सक्रिय थे कि 1989 से लेकर 1995 तक 6 साल के भीतर उन्होंने महाराष्ट्र के कोने-कोने के अनगिनत दौरे कर डाले। 1993 तक उन्होंने लाखों की तादाद में युवा अपने और शिवसेना के साथ जोड़ लिए। इसका नतीजा ये हुआ कि पूरे राज्य में शिवसेना का तगड़ा जमीनी नेटवर्क खड़ा हो गया।

2005 में शिवसेना पर उद्धव हावी होने लगे

2002 तक राज ठाकरे और उद्धव शिवसेना को संभाल रहे थे। 2003 में महाबलेश्वर में पार्टी का अधिवेशन हुआ। बालासाहेब ठाकरे ने राज से कहा- ‘उद्धव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाओ। राज ने पूछा, ‘मेरा और मेरे लोगों का क्या होगा।’ 2005 तक उद्धव पार्टी पर हावी होने लगे थे। पार्टी के हर फैसले में उनका असर दिखने लगा था। ये बात राज ठाकरे को अच्छी नहीं लगी।

2003 में महाबलेश्वर में पार्टी का अधिवेशन हुआ। यहां बाला साहेब ठाकरे ने राज से कहा कि उद्धव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष अनाउंस करो।

2003 में महाबलेश्वर में पार्टी का अधिवेशन हुआ। यहां बाला साहेब ठाकरे ने राज से कहा कि उद्धव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष अनाउंस करो।

राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ी, MNS का ऐलान किया

27 नवंबर 2005 को राज ठाकरे के घर के बाहर हजारों समर्थकों की भीड़ इकट्ठा हुई। यहां राज ने समर्थकों से कहा, ‘मेरा झगड़ा मेरे विट्ठल (भगवान विठोबा) के साथ नहीं है, बल्कि उसके आसपास के पुजारियों के साथ है।

कुछ लोग हैं, जो राजनीति की ABC को नहीं समझते हैं। इसलिए मैं शिवसेना के नेता के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। बालासाहेब ठाकरे मेरे भगवान थे, हैं और रहेंगे।’

9 मार्च 2006 को शिवाजी पार्क में राज ठाकरे ने अपनी पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ यानी मनसे का ऐलान कर दिया। राज ने मनसे को ‘मराठी मानुस की पार्टी’ बताया और कहा- यही पार्टी महाराष्ट्र पर राज करेगी।

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ठाकरे परिवार से जुड़ी ये खबर पढ़ें…

मुस्लिमों को ‘हरा जहर’ कहते थे बाल ठाकरे:बेटे को पार्टी सौंपी तो भतीजे ने बगावत की, शिंदे ने कैसे छीनी शिवसेना

शिवसेना पार्टी शुरू हुए अभी साल भर बीता था। इसके टॉप लीडर थे बालासाहेब ठाकरे। बलवंत मंत्री को पार्टी का दूसरा बड़ा नेता माना जाने लगा था। शिवसेना के तमाम बड़े मंचों पर बाल ठाकरे के साथ बलवंत मंत्री जरूर दिखते थे। हालांकि, दोनों नेताओं में कुछ मतभेद होने लगे थे। पूरी खबर पढ़ें..

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