Storyteller Devi Krishna Priya made cow service the basis of her life | कथावाचिका देवी कृष्णप्रिया ने गोसेवा को बनाया जीवन का आधार: धर्म और सेवा का संदेश देती हैं, राजस्थान में सक्रिय है ‘चैन बिहारी आश्रय फाउंडेशन’ – Jaipur News

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कथा वाचिका देवी कृष्णप्रिया आज धर्मगाथाओं की व्याख्याता के साथ-साथ गौसंरक्षण, युवा सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की सशक्त जन आवाज़ बन चुकी हैं।

कथा वाचिका देवी कृष्णप्रिया आज धर्मगाथाओं की व्याख्याता के साथ-साथ गौसंरक्षण, युवा सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की सशक्त जन आवाज़ बन चुकी हैं। श्रीमद्भागवत, शिव महापुराण और रामकथा पर उनके प्रवचन सरल, भावनात्मक और गहरे अर्थों से युक्त होते हैं। ये प्

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राजस्थान उनके सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ‘चैन बिहारी आश्रय फाउंडेशन’ की शाखाएं दौसा और बालोतरा में सक्रिय हैं। यहां से हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु धार्मिक यात्राओं में भाग लेते हैं। दौसा में विशेष रूप से चार धाम यात्रा और अन्य सांस्कृतिक स्थलों की यात्राओं का आयोजन होता है। इनमें हर साल 400 से 500 श्रद्धालु शामिल होते हैं।

6 वर्ष की आयु में दीक्षा प्राप्त की

कृष्णप्रिया निंबार्क संप्रदाय के संत रूप किशोर दास महाराज से मात्र 6 वर्ष की आयु में दीक्षा प्राप्त की। 7 वर्ष की उम्र में उन्होंने उज्जैन के सिंहस्थ मेले में पहली बार श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया। अब तक वे 400 से अधिक कथाओं का आयोजन भारत और विदेशों में कर चुकी हैं।

कथा वाचन के माध्यम से वह केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं देतीं। वे सेवा, करुणा और संस्कृति का संदेश भी देती हैं। उनका मानना है कि धर्म को केवल सुनना या कहना पर्याप्त नहीं है। उसे जीवन में उतारना आवश्यक है। उनके प्रवचन वेद-पुराणों की गूढ़ व्याख्या के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी जागृत करते हैं।

वे नियमित रूप से वृंदावन, हरिद्वार, प्रयागराज, द्वारका, बद्रीनाथ और उज्जैन में प्रवचन देती हैं। इसके अलावा अमेरिका, यूके, मॉरीशस, दुबई और श्रीलंका जैसे देशों में भी धार्मिक प्रवचन करती हैं। वे सनातन धर्म की नई पीढ़ी को सेवा और अध्यात्म के मार्ग से जोड़ने वाली प्रेरणास्त्रोत हैं।

चैन बिहारी आश्रय फाउंडेशन की नींव रखी

गोसेवा उनके जीवन का आधार है। एक घायल गोमाता को तड़पते हुए देखकर उनके भीतर सेवा का संकल्प जागा, जिसने “चैन बिहारी आश्रय फाउंडेशन” की नींव रखी। यह संस्था वर्तमान में मथुरा जनपद में बीघों भूमि पर फैली हुई है, जहां 200 से अधिक बीमार और बेसहारा गौवंशों को आश्रय, चारा और चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। यहां 30 से अधिक सेवक और चिकित्सक सतत सेवा में संलग्न हैं।

युवाओं को धर्म और सेवा से जोड़ना उनके कार्य की विशेषता है। आज हजारों युवा “चैन बिहारी आश्रय फाउंडेशन” से जुड़कर सोशल मीडिया अभियानों, कथा आयोजनों और प्रत्यक्ष गोसेवा में सक्रिय हैं। कृष्णप्रिया “शक्ति, सेवा और संस्कार” के मंत्र के साथ युवा पीढ़ी को धार्मिक जागरूकता और समाज सेवा के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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