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इन दिनों परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश के आरटीओ को दिए राजस्व लक्ष्य उन्हें अधिक लग रहे हैं। ऐसे में लक्ष्य पूर्ति के लिए एक ऐसा प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवा दिया है, जो राज्य और केंद्र सरकार की पॉलिसी के विपरीत है।
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दरअसल राज्य सरकार द्वारा आवंटित लक्ष्य को अत्यधिक मानते हुए जयपुर आरटीओ प्रथम राजेन्द्र सिंह शेखावत ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर टैक्स लगाए जाने का प्रस्ताव परिवहन मुख्यालय को भेजा है। इसमें आरटीओ ने अपने अधिक राजस्व लक्ष्य की चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स लगाकर उनके राजस्व लक्ष्य की पूर्ति आसानी से हो सकती है।
हालांकि केंद्र सरकार की नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को पूरी तरह से टैक्स मुक्त रखा हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से, डीजल-पेट्रोल वाहनों से प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन बढ़ाने के लिए के लिए सरकार ने यह नीति जारी की थी। खुद राजस्थान सरकार भी इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी देती रही है। गत 3 साल से सब्सिडी नहीं दी जा सकी है, लेकिन जल्द ही परिवहन मुख्यालय स्तर से सब्सिडी दी जाएगी।
प्रदेश में इलेक्ट्रिक कारों की खरीद में बढ़ोतरी हो रही, इसलिए टैक्स लगाना चाहिए
मुख्यालय को भेजे गए प्रस्ताव में लिखा है कि लक्ष्य 24% बढ़ा है। इस बार राजस्व लक्ष्य ~1751.05 करोड़ है, जो पिछले साल से 338.28 करोड़ अधिक है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक कारों की खरीद में बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए इन पर टैक्स लगाया जाना चाहिए। प्रस्ताव में 25 लाख से अधिक कीमत के ईवी वाहनों पर टैक्स लगाने की मांग की है, क्योंकि बीएमडब्ल्यू में एक ईवी वाहन की कीमत 1.20 से 1.42 करोड़ तक है।
ईवी वाहनों से टैक्स लिया जाए, तो विभाग को ~12 से 16 लाख राजस्व मिलेगा। मर्सिडीज में इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत 72 लाख से 3 करोड़ तक है। इनसे वन टाइम टैक्स (ओटीटी) लिया जाए, तो 7 से 30 लाख रुपए बतौर राजस्व मिलेगा। ऐसे में इन वाहनों पर पेट्रोल-डीजल वाहनों की तरह ही टैक्स लगाने की मांग की गई है।
प्रस्ताव की मुख्यालय में जबरदस्त चर्चा है, क्योंकि एक तरफ तो परिवहन विभाग ईवी वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी देने के लिए पोर्टल तैयार कर रहा है। आवेदन शुरू करते ही ईवी वाहन खरीदारों को सरकार की तरफ से सब्सिडी दी जाएगी। वहीं अब इन्हीं वाहनों से टैक्स वसूलने के प्रस्ताव को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि सूत्रों की मानें तो आरटीओ का ये प्रस्ताव खारिज किया जा सकता है। क्योंकि ईवी वाहनों पर टैक्स लगाना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है।