नई दिल्ली4 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हत्या आरोपियों को अग्रिम जमानत देने के फैसले पर पटना हाईकोर्ट को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है, लेकिन अदालतें पीड़ितों की तकलीफ को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी पटना हाईकोर्ट के मार्च 2024 के उस आदेश को रद्द करते हुए की, जिसमें एक महिला की हत्या के दो आरोपियों को अग्रिम जमानत दी गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह फैसला बहुत जल्दबाजी में किया और शिकायत करने वाले व्यक्ति को सुने बिना ही जमानत दे दी। कोर्ट ने इसे सही नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी चार हफ्ते के भीतर सरेंडर करें और उसके बाद चाहें तो नियमित जमानत के लिए अर्जी लगा सकते हैं।

SC बोला- हाईकोर्ट ने मर्डर जैसे क्राइम को हल्के में लिया
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस मामले में हाईकोर्ट ने मर्डर जैसे गंभीर अपराध को हल्के में लिया और बिना ठीक से वजह बताए जमानत दे दी। यह जमानत बिल्कुल भी सही नहीं थी, क्योंकि पीड़ित की पत्नी की हत्या दिनदहाड़े हुई थी।
कोर्ट ने कहा- व्यक्तिगत आजादी की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन अदालतों को यह भी देखना होगा कि पीड़ित को न्याय और सुरक्षा मिले। दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
कर्नाटक हाईकोर्ट से मर्डर केस में एक्टर को जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

रेणुकास्वामी मर्डर केस के आरोपी दर्शन और पवित्रा।
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को कर्नाटक हाईकोर्ट को कन्नड़ एक्टर दर्शन थुगुदीपा को जमानत देने के फैसले पर भी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट ने रेणुकास्वामी मर्डर केस में ज्यूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल किया है।
दरअसल, एक्टर दर्शन को रेणुकास्वामी मर्डर केस में 13 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी, जिसके बाद वो जेल से रिहा हुए थे। इसी के खिलाफ कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को मार्च में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
17 जुलाई को भी सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से एक्टर दर्शन को मिली जमानत पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि लगता है हाईकोर्ट ने अपने विवेक का सही इस्तेमाल नहीं किया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर की जमानत रद्द करने का फैसला सुरक्षित रखा है। पूरी खबर पढ़ें…
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दहेज हत्या केस-आरोपी बोला, ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा था, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इससे घर पर अत्याचार करने की आजादी नहीं मिलती

सुप्रीम कोर्ट ने 24 जून को दहेज हत्या के आरोपी को पुलिस के सामने सरेंडर से छूट देने से इनकार कर दिया था। आरोपी ने कोर्ट के सामने दलील दी थी कि वो ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा था। आरोपी ने कहा- मैं 20 साल से राष्ट्रीय राइफल्स में ब्लैककैट कमांडो हूं।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा, “आप ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थे, इससे आपको घर पर अत्याचार करने की आजादी नहीं मिल जाती है। आप देखिए कि फिजिकली कितने फिट हैं, ये दिखा रहा है कि आपने अपनी पत्नी का गला घोंट दिया हो, उसे मार डाला हो।” पूरी खबर पढ़ें…