सूरत में हुई बैठक के दौरान संत सीचेवाल
गुजरात के सूरत में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर.पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि देश की नदियां लोगों की भागीदारी के बिना साफ नहीं हो सकतीं। उन्होंने गंगा उदाहरण दिया, जो करोड़ों के बजट के बाद भी सा
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उन्होंने पवित्र बेई नदी का मॉल प्रस्तुत किया जिसकी सफाई के लिए 25 साल तक अनवरत चली। उन्होंने कहा कि जब तक नदियों की सफाई के लिए जनआंदोलन नहीं होता, तब तक प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि गंगा नदी इसका उदाहरण हैं। 20 हजार करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद यह प्रदूषण मुक्त नहीं हो पाई है।
इच्छा शक्ति से करना होगा काम
संत सीचेवाल ने बताया कि 165 किमी लंबी पवित्र बेई नदी को बाबा नानक के चरणों से पवित्र माना जाता है। इसकी सफाई संगतों ने अपने हाथों से की थी। उन्होंने 25 वर्षों तक बिना रुके सेवा जारी रखी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यमुना सहित देश की सभी नदियाँ साफ हो सकती हैं, बशर्ते इसके लिए इच्छाशक्ति, सही नीति और साफ नीयत हो।

गुजरात में बैठक में प्रोजेक्ट दिखाते संत सीचेवाल
दूषित जल के उपयोग पर चर्चा
बैठक में सूरत शहर में दूषित पानी को शुद्ध कर दोबारा उपयोग में लाने पर चर्चा हुई। यहां वर्तमान में ट्रीट किए गए पानी से सालाना 160 करोड़ रुपये की आय हो रही है। शहर का लक्ष्य 2050 तक गंदे पानी को शुद्ध कर सुरक्षित उपयोग में लाना है। सीचेवाल मॉडल में मंत्रियों से लेकर राष्ट्रपति ने दिखाई थी रुचि
उन्होंने “सीचेवाल मॉडल” का भी जिक्र किया। इसका अध्ययन पाँच राज्यों के 1657 गाँवों की पंचायतों ने गंगा को स्वच्छ करने के लिए किया था। बिहार के सीएम नीतीश कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम ने भी इममें विशेष रुचि दिखाई थी।