Kerala Sabarimala Temple Gold Case; TDB Devaswom Board | High Court | सबरीमाला गोल्ड चोरी केस: 9 अधिकारियों एक्शन लेगा बोर्ड: टीडीबी अध्यक्ष ने कहा- 14 अक्टूबर को बोर्ड बैठक में अन्य पर कार्रवाई का फैसला

Actionpunjab
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तिरुवनंतपुरम7 मिनट पहले

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सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी केस में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड(TDB) की वीजिलेंस विंग ने 9 अधिकारियों के खिलाफ ऐक्शन लेने का फैसला किया है। TDB अध्यक्ष पीएस प्रसांत ने शनिवार को कहा कि डिप्टी देवास्वोम कमिश्नर (हरिपाड़) बी मुरारी बाबू के खिलाफ पहले ही कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

प्रसांत ने कहा कि बाकी अधिकारियों पर 14 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड बैठक में फैसला लिया जाएगा। जिनपर एक्शन लिया जाएगा उनमें TDB की सेक्रेटरी जयश्री, एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सुदीश, प्रशासनिक अधिकारी श्रीकुमार और पूर्व तिरुवभरनम कमिश्नर केएस बैजू शामिल हैं।

प्रसांत ने कहा कि बैजू के बाद आए अधिकारी को सोने के वजन में कमी का पता था, लेकिन उन्होंने इसे रिपोर्ट नहीं किया।

प्रसांत ने राजनीतिक बयानबाजी पर कहा कि-

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केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन को जिम्मेदारी से बयान देने चाहिए। वर्तमान बोर्ड का इस मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी हमारे खिलाफ आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं। सबरीमाला तीर्थ यात्रा सीजन की तैयारियां चल रही हैं और इस साल करीब 60 लाख भक्त आने की उम्मीद है। ऐसे आरोप केवल उन लोगों को प्रभावित करते हैं जो सबरीमाला सीजन को आयोजित करने के लिए काम कर रहे हैं।

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उनके अनुसार, 2019 के बोर्ड के आदेश में निर्देश दिया गया था कि द्वारपालक प्लेटें तिरुवभरणम कमिश्नर की देखरेख में सौंपी जाएं, और ज़िम्मेदारी उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंपी जाए।

शुक्रवार को कोर्ट ने SIT गठित करने के निर्देश दिए थे

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अब तक की जांच से लग रहा है कि सबरीमाला मंदिर के गेट पर रखी दो प्रतिमाओं (द्वारपालक) से सोने की हेराफेरी हुई है। कोर्ट ने मामले में क्रिमिनल केस दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच शुरू करने का निर्देश दिया।

जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की बेंच ने SIT को छह हफ्ते के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने और हर दो हफ्ते में एक बार जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए।

बेंच ने आगे कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि उन्नीकृष्णन पोट्टी (सोने की परत चढ़ाने की पेशकश करने वाले स्पांसर) को काफी मात्रा में सोना सौंपा गया था। कोर्ट ने कहा कि पोट्टी को लगभग 474.9 ग्राम सोना दिया गया था।

उन्नीकृष्णन ने एक लड़की की शादी के लिए बचे हुआ सोना मांगा था

हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर को पिछली सुनवाई में द्वारपालक की मूर्तियों से सोने की चोरी मामले की जांच के लिए SIT गठित की थी। कोर्ट ने उन्नीकृष्णन पोट्टी के उस ईमेल का भी जिक्र किया, जो उसने 9 दिसंबर, 2019 को TDB के अध्यक्ष को भेजा था।

उन्नीकृष्णन ने ईमेल में लिखा था- सबरीमाला गर्भगृह के मुख्य द्वार और द्वारपालकों की मूर्तियों पर परत चढ़ाने के बाद मेरे पास कुछ सोना बचा है। मैं TDB के साथ मिलकर इसका इस्तेमाल एक लड़की की शादी के लिए करना चाहता हूं, जिसे मदद की जरूरत है। कृपया इस संबंध में अपनी राय दें।

हाईकोर्ट ने कहा- TDB के अधिकारी के भी हेराफेरी में शामिल अदालत ने कहा कि 2019 में उन्नीकृष्णन को सोने की परत चढ़ाने के लिए सौंपी गई मूर्तियों पर केवल तांबे की प्लेटें नहीं थीं, बल्कि 1999 में उन पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। इस खुलासे से चोरी का केस बन गया है।

अदालत ने कहा-

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यह खुलासा परेशान करता है। इससे पता चलता है कि TDB के अधिकारी के भी उन्नीकृष्णन के साथ मिले हुए हैं। पूरे मामले में सिर्फ उन्नीकृष्णन और स्मार्ट क्रिएशंस कंपनी नहीं, बल्कि TDB के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। रिकॉर्ड से साफ पता चलता है कि TDB अधिकारियों को लेन-देन और सोने के अवैध ट्रांसफर की जानकारी थी।

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इन्हीं द्वारपालक मूर्ति के नीचे लगी सोने की प्लेट हुई थी गायब।

इन्हीं द्वारपालक मूर्ति के नीचे लगी सोने की प्लेट हुई थी गायब।

TDB ने कमिश्नर बी मुरारी को निलंबित किया सबरीमाला मंदिर के TDB ने मंगलवार को हरिपाद में डिप्टी देवास्वोम कमिश्नर बी मुरारी बाबू को जांच के दौरान निलंबित कर दिया। बोर्ड के मुताबिक, बाबू ने 17 जुलाई 2019 को सबरीमाला के कार्यकारी अधिकारी को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें उन्होंने मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ लगी सोने की मूर्तियों को गलत तरीके से तांबे की बताया था। बोर्ड ने इसे गंभीर चूक माना।

उधर, बाबू ने आरोपों से इनकार किया। बाबू ने दावा किया कि 2019 में उन्होंने मंदिर के तांत्री की राय लेकर प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में तांबे की प्लेट लिखा क्योंकि वास्तव में तांबा ही साफ दिख रहा था। इसलिए सोना चढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को TDB को फटकार लगाई थी

29 सितंबर को मामले में जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान TDB को फटकार लगाई। कहा कि बोर्ड ने मंदिर की कीमती सामान का सही रजिस्टर नहीं रखा, जिससे गड़बड़ियां छिपाने में मदद मिली।

अदालत ने कहा कि भक्तों के चढ़ाए आभूषण और सिक्कों का रिकॉर्ड रजिस्टर में रखा जाता है, जिसमें डिस्क्रिप्शन, तारीख, प्राप्ति और क्वालिटी लिखी जाती है, लेकिन कोडीमारम, द्वारपालक मूर्तियां, पीडम जैसी अन्य चीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

अदालत ने नोट किया कि इन सामानों को किसी को देने की भी कोई एंट्री नहीं है। द्वारपालक मूर्तियों को दोबारा लगाते समय उनका वजन भी रिकॉर्ड नहीं किया गया, जो जानबूझकर हुआ जिससे 4 किलो सोने की कमी सामने न आए।

छत पर सोने की परत चढ़ाने के रजिस्टर भी गायब

कोर्ट ने कहा कि 1999 में श्रीकोविल की छत पर सोने की परत चढ़ाने के काम का रजिस्टर भी गायब है। कारीगरों के अनुसार तब 30 किलो से ज्यादा सोना इस्तेमाल हुआ था, लेकिन कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।

अदालत ने निर्देश दिया कि एक्सपर्ट की मदद से मंदिर की सभी कीमती चीजों की पूरी इन्वेंटरी और मूल्यांकन किया जाए। देवस्वम बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही की भी जांच की जाए। मामले की अगली सुनवाई अब अक्तूबर के अंत में होगी।

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