4-month-old’s skin stuck to bones | 4 महीने के मासूम की चमड़ी हड्डियों से चिपकी: कुपोषण से वजन ढाई किलो, सतना जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती – Satna News

Actionpunjab
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सतना जिला अस्पताल में कुपोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। शनिवार को चार माह के एक मासूम बच्चे को अति गंभीर कुपोषित अवस्था में पीडियाट्रिक आईसीयू (पीआईसीयू) में भर्ती कराया गया। बच्चे का वजन मात्र ढाई किलोग्राम है, जबकि सामान्यतः इस उम्र के बच्चे क

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अस्पताल में भर्ती करने से पहले बच्चे की पोषण पुनर्वास केंद्र में स्क्रीनिंग भी की गई। यह मामला शनिवार को जिला अस्पताल की पीडियाट्रिक ओपीडी में सामने आया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी बच्चों का इलाज कर रहे थे, तभी जैतवारा क्षेत्र के मरवा निवासी आसमा बानो अपने चार माह के बेटे हुसैन रजा को लेकर आईं। बच्चे की गंभीर हालत देखकर डॉ. द्विवेदी ने तुरंत उसे पोषण पुनर्वास केंद्र भेजकर पीआईसीयू में भर्ती करने के निर्देश दिए।

परिवार ने पुणे में बच्चे को डॉक्टर को दिखाया था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।

परिवार ने पुणे में बच्चे को डॉक्टर को दिखाया था, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।

अब तक एक भी टीका नहीं लगा चौंकाने वाली बात यह भी है कि हुसैन को अभी तक एक भी टीका नहीं लगा है। परिजनों ने बताया कि वे गरीब हैं और मजदूरी कर पेट पालते हैं। हुसैन के जन्म के बाद पूरा परिवार पुणे चला गया था, जहां उसकी मां आसमा बानो भी मजदूरी करती रहीं। इस दौरान हुसैन की हालत बिगड़ती चली गई।

परिजनों ने पुणे में कई बार डॉक्टरों को दिखाने की बात कही, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। जब स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो वे गांव लौटे और बच्चे को जिला अस्पताल लेकर आए। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में हुसैन रजा की कोई जानकारी दर्ज नहीं है।

बच्चे की हालत के लिए परिजन भी जिम्मेदार डॉ. संदीप द्विवेदी ने बताया कि बच्चा अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में है। उसकी हालत भी गंभीर है। अति कुपोषित बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती कराकर इलाज शुरू कर दिया गया है। हालांकि बच्चे की ऐसी हालत के लिए परिजन भी जिम्मेदार रहते हैं।

9 संस्थाओं में 70 बेड आरक्षित वैसे तो कुपोषितों को भर्ती कराने के लिए जिला अस्पताल में 20 बेड के अलावा ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 10-10 बेड के पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं। यहां कुपोषित बच्चों को इलाज के साथ पोषण आहार मुहैया कराना है। सच्चाई ये है कि मैदानी अमले की लापरवाही के चलते सब बेकार हैं। अधिकांश समय पोषण पुनर्वास केन्द्रों में बेड खाली रहते हैं।

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