Air Taxi Plan; Punjab Startup Nalwa Aero | Flying Car | दिल्ली में साल 2028 से एयर टैक्सी की शुरुआत संभव: 3 घंटे तक का सफर 10 से 12 मिनट में पूरा होगा, शुरुआती किराया ₹500 होगा

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नई दिल्ली16 घंटे पहलेलेखक: एम. रियाज हाशमी

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नलवा एयरो का इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटॉल) 5 सीटर है। - Dainik Bhaskar

नलवा एयरो का इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटॉल) 5 सीटर है।

भारत में 2028 तक एयर टैक्सी उड़ान भरने लगेंगी। ये कहीं से भी सीधे उड़ान भर सकती हैं और कहीं भी लैंड कर सकती हैं। पंजाब के मोहाली स्थित स्टार्टअप नलवा एयरो ने स्वदेशी ईवीटॉल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) एयर टैक्सी विकसित की है। DGCA ने इसे डिजाइन ऑर्गेनाइजेशन अप्रूवल (डीओए) सर्टिफिकेट भी दे दिया है।

नलवा एयरो के सीईओ कुलजीत सिंह संधू के मुताबिक- कोविड-19 में एक मित्र ने इमरजेंसी मेडिकल इवैक्युएशन की जरूरत बताई। आसपास कोई एयर एम्बुलेंस या हेलीपैड नहीं था। तभी विचार आया कि क्यों न ऐसी मशीन बनाएं जो कहीं से भी वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सके।

उन्होंने कहा कि इसका डिजाइन चरण पूरा हो चुका है। सब-स्केल प्रोटोटाइप अगले एक माह में तैयार हो जाएगा। यह किफायती एयर मोबिलिटी मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। शुरू में दिल्ली-एनसीआर में लॉन्च होगी।

आईजीआई एयरपोर्ट से आनंद विहार, नोएडा, गाजियाबाद और पानीपत जैसी जगहों तक सड़क से जाने में एक से 3 घंटे लगते हैं। ईवीटॉल एयर टैक्सी 10 से 12 मिनट में पहुंचा देगी। आईजीआई एयरपोर्ट से आनंद विहार का शुरुआती किराया लगभग 500 रु. प्रति व्यक्ति रहने का अनुमान है। दिल्ली के बाद ये मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु सहित अन्य मेट्रो शहरों में भी दिखेंगी।

नलवा एयरो के इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटॉल) का डिजाइन।

नलवा एयरो के इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटॉल) का डिजाइन।

8 रोटर सिस्टम, क्रैश नहीं होगा

संधू के अनुसार ईवीटॉल में 8 रोटर सिस्टम हैं। दो फेल भी हो जाएं तो विमान क्रैश नहीं होगा। तीन बंद होने पर सुरक्षित लैंडिंग संभव है। यह हेलिकॉप्टर से सुरक्षित है।

हेलिकॉप्टर की तुलना में 10 गुना शांत और परिचालन लागत में 90% से अधिक सस्ती होगी। हेलिकॉप्टर का परिचालन खर्च 5 लाख रु. प्रति घंटे तक पहुंच सकता है, जबकि ईवीटॉल की लागत इसके 10% से भी कम रहेगी।

कंपनी के अनुसार ये एयरक्राफ्ट फेडरेल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) के रेगुलेशन के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।

अभी गुजरात और आंध्र प्रदेश में ईवीटॉल के लिए सैंड बॉक्स ट्रायल साइट तैयार की जा रही हैं। इनमें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भी भागीदार है।

तकनीक: सिंगल चार्ज में 300 किमी तक उड़ान भरेगी टैक्सी

कंपनी दो मॉडलों पर काम कर रही है। पहला, लीथियम आयन बैटरी संचालित है। यह सिंगल चार्ज में 90 मिनट या 300 किमी तक उड़ेगा। दूसरा हाइड्रोजन फ्यूल सेल मॉडल है, जिसकी रेंज 800 किमी तक होगी। फास्ट चार्जर से बैटरी 50 मिनट में चार्ज होगी।

कंपनी के 3 प्रमुख मॉडल हैं। 2 स्ट्रेचर वाला एम्बुलेंस वर्जन, 5 से 7 सीटर यात्री एयर टैक्सी और कार्गो मॉडल। एयर टूरिज्म, निगरानी एवं टोही विमान और मेडिवैक संस्करण (चिकित्सीय निकासी मॉडल) पर भी काम चल रहा है।

टैक्सी की तरह बुक कर सकेंगे

नलवा एयरो का ईवीटॉल भारत में विकसित पहली और सबसे उन्नत एयर टैक्सी तकनीक है। इसके एडवांस फ्लाइंग कंप्यूटर, टिल्टिंग प्रपल्शन सिस्टम और बॉक्स-विंग डिजाइन पर सालों रिसर्च हुआ है।

विमान 4000 किग्रा अधिकतम टेक-ऑफ भार और 1000 किग्रा पेलोड उठा सकता है। क्रूज स्पीड 350 किमी/ घंटा है जो 400 तक जा सकती है। यह एयर टैक्सी, मेडिकल एम्बुलेंस, डिफेंस सर्विलांस, सर्च एंड रेस्क्यू और कार्गो ट्रांसपोर्ट, सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।

  • जीरो कार्बन: एटीएफ नहीं, बिजली/हाइड्रोजन से उड़ेगा। जीरो कार्बन, कम खर्च और आवाज।
  • वर्टिकल तकनीक: रनवे पर इंतजार नहीं, सीधे उठना और उतरना संभव। इमारतों की छत से भी टेक-ऑफ और लैंडिंग हो सकेगी।
  • फ्लाई बाइ वायर: पायलट के हाथ में डिजिटल कंट्रोल, सबकुछ कंप्यूटर नियंत्रित।
  • इंडिया मेक: स्वदेशी डिजाइन और मेक इन इंडिया मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसमें लगी 60% तकनीक घरेलू ही है।
  • जॉब: नई स्किल, पायलट ट्रेनिंग, मेंटेनेंस व चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में हजारों रोजगार होंगे।
  • दूरगामी असर: मेडिकल इमरजेंसी में समय की बचत होगी। कम खर्च में मरीज को जल्द से जल्द उपयुक्त अस्पताल में पहुंचा सकेंगे।

भविष्य: तीन साल बाद बिना पायलट के भी उड़ान संभव नलवा एयरो ने पायलट आधारित और ऑटोनॉमस यानी बिना पायलट उड़ान, दोनों तकनीकों पर समानांतर सफलता हासिल की है। पहले 3 सालों तक यात्री उड़ानें पायलट आधारित रहेंगी। कार्गो फ्लाइट्स पहले ही ऑटोनॉमस के तौर पर शुरू की जा सकती हैं।

तीन साल के बाद ऑटोनॉमस यात्री उड़ानों पर विचार किया जाएगा। जब तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की सभी सर्टिफिकेशन संबंधी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक ऑटोनॉमस यात्री उड़ानें शुरू नहीं की जाएंगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर: मेट्रो स्टेशन में ही बन सकेंगे वर्टिपोर्ट

वर्टिपोर्ट के लिए मौजूदा शहरी ढांचा आधार बन सकता है। मेट्रो स्टेशन व बड़ी इमारतों की छतों पर इनकी लैंडिंग संभव है। सरकार हर 50 किमी पर 1000 हेली पैड्स विकसित कर रही है। वे वर्टिपोर्ट बन सकते हैं। हेलिकॉप्टर के लिए 20×25 मीटर जगह जरूरी है। ईवीटॉल को सिर्फ 12×12 मीटर जगह चाहिए।

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