8 घंटे पहले
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इस बार तिथियों की घट-बढ़ की वजह से देवउठनी एकादशी 1 और 2 नवंबर को दो दिन है। मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु विश्राम से जागते हैं, इसलिए इसे देवउठनी और देव प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि पर तुलसी और शालीग्राम का विवाह कराने की भी परंपरा है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चार माह बाद इसी दिन श्रीहरि योगनिद्रा से जागते हैं। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों के लिए मुहूर्त मिलने लगते हैं। एकादशी पर ध्रुव, रवि और त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। एकादशी तिथि 1 नवंबर की सुबह करीब 9.10 बजे से शुरू होगी और 2 नवंबर की सुबह 7.30 बजे तक रहेगी।
एकादशी दो दिन होने से व्रत और तुलसी विवाह पर्व की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं। कुछ पंचांगों में 1 नवंबर को एकादशी व्रत और तुलसी विवाह बताया गया है और कुछ में 2 नवंबर को।
देवउठनी एकादशी से जुड़ी परंपराएं
- इस दिन तुलसी और भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम का विवाह कराया जाता है। मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है, भक्त को मोक्ष मिलता है।
- माना जाता है कि इस दिन किए गए धर्म-कर्म और पूजा पाठ से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां भी दूर हो सकती हैं।
- तुलसी को धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए तुलसी पूजा करने से महालक्ष्मी की कृपा मिलती है।
- तुलसी को रोज सुबह जल चढ़ाना चाहिए और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए।
ऐसे कर सकते हैं तुलसी-शालीग्राम की पूजा
- चौकी पर लाल आसन बिछाएं और तुलसी का पौधा स्थापित करें। एक अन्य चौकी पर भगवान शालीग्राम को स्थापित करें, आप चाहें तो तुलसी के पौधे का पास ही शालीग्राम जी स्थापित कर सकते हैं।
- तुलसी के ऊपर गन्ने से मंडप बनाएं। कलश स्थापित करें। दीपक जलाएं। तुलसी को लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी अर्पित करें। भोग लगाएं। आरती करें।
- पूजा के अंत में परिक्रमा करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्, मंत्रों का जप करें। पूजा के बाद भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
एकादशी पर करें ये शुभ काम
- एकादशी पर घर में स्थापित बाल गोपाल का विशेष अभिषेक करना चाहिए। बाल गोपाल को पंचामृत चढ़ाएं। तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
- भगवान शिव को जल चढ़ाएं। बिल्व पत्र, चंदन, आंकड़े के फूल, धतूरे से शिवलिंग का श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। आप चाहें तो ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं।
- किसी सुहागिन को सुहाग का सामान जैसे लाल साड़ी, चूड़ियां, बिंदिया, सिंदूर दान करें।
- गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।