Punjab ludhiana powercom contract workers protest sanjeev-arora house PSPCL employees strike latest update | पंजाब में PSPCL के कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिमों की हड़ताल: बिजली मंत्री के घर के बाहर आज से धरना, पावर सप्लाई प्रभावित होगी – Ludhiana News

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पंजाब में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिम आज से अनिश्चित काल के हड़ताल पर चले गए हैं। मुलाजिमों ने आज से बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा के घर के बाहर पक्के धरने पर बैठने का ऐलान किया हे। पंजाब भर से कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिम 11 बजे से

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मुलाजिमों के हड़ताल पर जाने से बिजली सप्लाई प्रभावित होगी। क्योंकि इन कर्मचारियों के पास पावर कॉम की कंप्लेंट हल करने की जिम्मेदारी हे। मंत्री के घर का होगा घेराव

28 अक्तूबर को हुए विरोध के बाद लुधियाना प्रशासन ने 6 नवम्बर की मीटिंग तय करवाई थी। लेकिन पावरकॉम मैनेजमेंट ने 5 नवम्बर को ही पत्र जारी कर मीटिंग से इन्कार कर दिया। इसके बाद यूनियन ने ऐलान किया कि अब 7 नवम्बर की सुबह से बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा के घर के बाहर अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा।

लुधियाना में बड़ा प्रदर्शन आज यूनियन ने कहा है कि अब कोई पीछे हटने वाला नहीं है जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मानती,आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने 9 नवम्बर को तरनतारन विधानसभा उपचुनाव क्षेत्र में झंडा मार्च करने का भी ऐलान किया है । सरकार पर निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप

यूनियन नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार और बिजली विभाग निजीकरण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहे हैं। पावरकॉम की इमारतें और संपत्तियां बेचने ठेका कंपनियों को बढ़ावा देने तथा चिप वाले स्मार्ट मीटर लगाने की नीति के ज़रिए विभाग को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार के बिजली संशोधन बिल-2025 को पूरी तरह रद्द करने की मांग की और कहा कि यह बिल बिजली क्षेत्र को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश है।

400 से ज़्यादा कर्मियों की जान गई, मुआवज़ा व नौकरी नहीं मिली

यूनियन का कहना है कि विभाग में सुरक्षा प्रबंधों की भारी कमी है। सेफ्टी किट न मिलने और खराब व्यवस्था के चलते अब तक 400 से अधिक ठेका कर्मचारी करंट लगने से मौत का शिकार हो चुके हैं, जबकि सैकड़ों स्थायी रूप से विकलांग हो गए हैं। फिर भी सरकार और प्रबंधन ने किसी परिजनों को न तो नौकरी दी, न पेंशन, न उचित मुआवज़ा।

ठेका खत्म करो पक्की नौकरी दो

यूनियन ने 1948 के श्रम अधिनियम और 15वीं श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के तहत न्यूनतम वेतन लागू करने, और सभी आउटसोर्स ठेका कर्मचारियों को सीधे विभाग में शामिल करने की मांग दोहराई।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव के दौरान ठेका प्रथा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार उल्टा ठेका पॉलिसी को और बढ़ा रही है।

ये हैं ठेका कर्मचारियों की मुख्य मांगे पावरकॉम और ट्रांसको का निजीकरण पूरी तरह रद्द किया जाए। सभी ठेका और आउटसोर्स कर्मियों को सीधे विभाग में शामिल किया जाए। बिजली हादसों में मारे गए कर्मियों के परिजनों को पक्की नौकरी और पेंशन दी जाए। 1948 एक्ट या 15वीं लेबर कॉन्फ्रेंस के अनुसार वेतन लागू किया जाए। विभागीय पदों पर लगी रोक हटाई जाए और नई भर्तियां की जाएं। कार्यस्थलों पर सेफ्टी किट व सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं।

आंदोलन के असर की आशंका

यूनियन ने आज रात 12 बजे से काम पूरी तरह ठप करने (वर्क जाम) का ऐलान किया है। इससे पूरे पंजाब में बिजली सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

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