lesson of lord krishna and lord shiva, story of krishna, margshirth month significance in hindi | युद्ध के बाद श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे शिवजी और ब्रह्माजी: श्रीकृष्ण की सीख: जब तक लक्ष्य पूरा न हो जाए, तब तक अपना ध्यान काम से न हटाएं

Actionpunjab
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15 घंटे पहले

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अभी मार्गशीर्ष मास चल रहा है और इस मास में श्रीकृष्ण की पूजा के साथ ही उनकी कथाएं पढ़ने-सुनने की परंपरा है। भगवान की कहानियों में जीवन प्रबंधन के सूत्र भी छिपे हैं, इन सूत्रों को जीवन में उतार लेने से हमारी कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। यहां जानिए श्रीकृष्ण का एक ऐसा प्रसंग, जिसमें भगवान ने लक्ष्य पूरा करने का तरीका बताया है…

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के जीवन में सब कुछ ठीक हो चुका था। श्रीकृष्ण अपनी नगरी द्वारका लौट आए थे। कई वर्षों के बाद एक दिन भगवान शिव, ब्रह्मा, इंद्र और अनेक देवता श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। इन तीनों देवताओं ने श्रीकृष्ण को प्रणाम किया, श्रीकृष्ण ने पूछा कि देवगण, आज आप सब एक साथ आए हैं, अवश्य कोई विशेष बात है?

ब्रह्मा जी ने सबकी ओर से उत्तर दिया कि प्रभु, आपने जब-जब अवतार लिया, तब-तब धरती को बुराइयों से मुक्त किया। आपने मानव को कर्म, प्रेम, और धर्म का मार्ग दिखाया। अब आपके अवतार का समय पूरा हो चुका है। आपने अपने सारे उद्देश्य पूर्ण कर लिए हैं। अब समय आ गया है कि आप अपने परमधाम लौट चलें।

ये सुनकर श्रीकृष्ण के कहा कि आप सबका आगमन मेरे लिए सौभाग्य की बात है, पर अभी कुछ कार्य शेष हैं। मेरे यदुवंशी पुत्र और बंधु अधर्मी हो गए हैं। मैंने उन्हें अब तक रोक रखा है, लेकिन अब इनकी गति को भी रोकना उचित नहीं। ये आपस में संघर्ष करेंगे और अपने कर्मों का फल पाएंगे। बुराई का जो अंतिम अंश इस धरती पर शेष है, उसे भी मिटाना है। सही समय आने पर ही मैं आपके साथ अपने धाम लौटूंगा। जब कलियुग का आरंभ होगा, तब मैं पुनः किसी रूप में आऊंगा, धर्म की रक्षा के लिए।

तीनों देवता श्रीकृष्ण की बात सुनकर उन्हें प्रणाम करके वहां से लौट गए। इसके बाद श्रीकृष्ण ने शांत भाव से द्वारका के चारों ओर दृष्टि डाली, वे जानते थे कि अब अपने धाम लौटने का समय निकट है, लेकिन अधूरा कार्य छोड़कर वे नहीं जाएंगे।

कुछ समय बाद यदुवंशियों के आपसी संघर्ष में वही हुआ जो श्रीकृष्ण ने कहा था, सभी यदुवंशी आपस में लड़-झगड़कर मारे गए। द्वारका डूबने लगी। श्रीकृष्ण ने अपने अंतिम क्षणों में वन में विश्राम किया और वहां से अपने धाम के लिए लौट गए। श्रीकृष्ण ने अपने धाम लौटते समय संदेश दिया कि कर्म का अंत नहीं तब तक होता, जब तक कि कार्य पूर्ण न हो।

श्रीकृष्ण की सीख

  • कोई काम को अधूरा न छोड़ें

श्रीकृष्ण ने संदेश दिया है कि जब तक अपने कार्य पूरा न हो जाए, उन्हें अधूरा छोड़ने से हम अपने उद्देश्य से भटक सकते हैं। हर व्यक्ति को अपने छोटे-बड़े काम में पूर्णता का भाव रखना चाहिए। अधूरे काम बोझ बनते हैं और जीवन में अशांति आती है।

  • समय का सम्मान करें

हर कार्य के लिए एक उचित समय होता है। श्रीकृष्ण ने कहा कि वे सही समय आने पर अपने धाम लौटेंगे, भगवान ने संदेश दिया कि समय का सम्मान करना चाहिए और सही समय पर सही काम करना चाहिए।

  • आत्मसंयम बनाए रखें

जब परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर हों, तब आत्मसंयम ही सबसे बड़ा सहायक बनता है। श्रीकृष्ण ने यह जानते हुए कि यदुवंश का नाश होगा, उसे स्वीकार किया। कभी-कभी हालात मुश्किल हो जाते हैं, ऐसी स्थिति के लिए श्रीकृष्ण ने संदेश दिया है कि हर घटना को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करना चाहिए, तभी शांति मिलती है।

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