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राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर पीठ ने जैसलमेर के ऐतिहासिक गड़ीसर तालाब के संरक्षण और विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि रेगिस्तान के बीच स्थित
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याचिकाकर्ता सुनील पालीवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर गड़ीसर तालाब के कैचमेंट एरिया को बढ़ाने की मांग की है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि 12 जून 1961 की अधिसूचना में उल्लेखित सीमाओं को बनाए रखा जाए और गड़ीसर तालाब को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मानस रणछोड़ खत्री ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पंवार और अतिरिक्त महाधिवक्ता राकेश शर्मा ने पक्ष रखा।
जैसलमेर की पर्यटन महत्ता पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जैसलमेर विश्व मानचित्र पर एक बेहद प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसलिए गड़ीसर तालाब के कैचमेंट एरिया को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए यह जनहित याचिका महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने माना कि तालाब का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी जरूरी है।
पिछले 2-3 सीजन में तालाब/झील में भरपूर पानी
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पिछले दो-तीन सीजन में गड़ीसर तालाब को पर्याप्त पानी मिला है और यह अपनी कुल क्षमता से अधिक भरा हुआ बताया गया था। रेगिस्तान के बीच में यदि गड़ीसर तालाब को पर्याप्त पानी मिल रहा है, तो कोर्ट ने माना कि क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा के कारण मीठे पानी के संरक्षण और परिरक्षण के लिए योजनाएं बनाना राज्य सरकार का बाध्यकारी कर्तव्य है।
राज्य सरकार को निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार से अपेक्षा की है कि जनहित याचिका का जवाब दाखिल करते समय वह आदेश में की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखे। सरकार की तरफ से वकील ने याचिका का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
गड़ीसर तालाब/झील का ऐतिहासिक महत्व
गड़ीसर तालाब जैसलमेर की पहचान है और यह सदियों से शहर की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत रही है। यह तालाब न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि विश्वभर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। कोर्ट का यह आदेश तालाब के संरक्षण और विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।