Utpanna Ekadashi vrat on 15th November, Significance of Ekadashi vrat, utpanna ekadashi vrat katha | उत्पन्ना एकादशी व्रत 15 नवंबर को: अगहन कृष्ण की 11वीं तिथि पर प्रकट हुई थीं देवी एकादशी, भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का करें अभिषेक

Actionpunjab
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10 घंटे पहले

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कल 15 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी व्रत है। मान्यता है कि अगहन कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि पर देवी एकादशी प्रकट हुई थीं, इसलिए इस व्रत का नाम उत्पन्ना पड़ा है। एक साल में कुल 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन जब साल में अधिकमास रहता है, तब 26 एकादशियां हो जाती हैं। ये व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम के अध्याय में सालभर की सभी एकादशियों के बारे में बताया गया है। भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई थी, जिसने मूर नाम के असुर का अंत किया था। यही शक्ति एकादशी देवी कहलायी। भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी व्रत का महत्व बताया था।

उत्पन्ना एकादशी व्रत से भक्त के नकारात्मक विचार दूर होते हैं, क्रोध शांत होता है और विष्णु जी की कृपा से परेशानियां दूर होती हैं। जो लोग एकादशी व्रत नहीं रख पाते हैं, उन्हें कम से कम भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा जरूर करनी चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत

  • एकादशी व्रत दशमी तिथि की शाम से ही शुरू हो जाता है। उत्पन्ना एकादशी के एक दिन पहले यानी आज दशमी तिथि (14 नवंबर) की शाम भगवान विष्णु का पूजन करें, पूजा के बाद सात्विक भोजन करें। इसके बाद एकादशी तिथि की सुबह सूर्योदय से पहले जागें और स्नान करके सूर्य को जल चढ़ाएं।
  • घर के मंदिर में विष्णु-लक्ष्मी के सामने एकादशी व्रत और पूजन करने का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु-लक्ष्मी का विधिवत अभिषेक करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के बाद दिनभर निराहार रहें। भूखे रहना संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं, दूध और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं।
  • शाम को भी विष्णु पूजा करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर भी जल्दी जागें। सुबह पूजा करने के बाद जरूरतमंद को खाना खिलाएं, इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।
  • इस व्रत में पूजा-पाठ के साथ ही भगवान विष्णु और उनके अवतारों की कथाएं भी पढ़नी-सुननी चाहिए।

एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम

  • विष्णु-लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत प्रथम पूज्य गणेश जी के ध्यान के साथ करें। गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाएं, पूजा में ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जप करें।
  • शिवलिंग पर जल, बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं। चंदन का लेप करें। धूप-दीप जलाएं। मिठाई का भोग लगाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
  • हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। समय हो तो सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं। आप चाहें तो राम नाम का जप भी कर सकते हैं।
  • अभी ठंड का समय है, इसलिए जरूरतमंद लोगों को कंबल, ऊनी वस्त्र, जूते-चप्पल दान करें। भोजन कराएं। अन्न, धन का भी दान कर सकते हैं। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।

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