16 घंटे पहले
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कल रविवार, 16 नवंबर को सूर्य तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहा है, इसके बाद ये ग्रह 16 दिसंबर तक इसी राशि में रहेगा। ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। संक्रांति का महत्व भी पर्व जैसा ही है, इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, वृश्चिक संक्रांति के साथ ही शरद ऋतु खत्म होती है और हेमंत ऋतु की शुरू हो जाती है। इस पर्व से मौसम बदलने लगता है। इसलिए इस संक्रांति पर नदी स्नान, व्रत-उपवास, पूजा-पाठ और जरूरतमंद लोगों को दान करने का विशेष महत्व है।
संक्रांति पर कर सकते हैं ये शुभ काम
वृश्चिक संक्रांति की सुबह सूर्योदय से पहले जागना चाहिए। स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और जल में कुमकुम, फूल, चावल भी डालें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए उगते सूर्य को जल चढ़ाएं।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। अगर नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। गंगाजल भी न हो तो सभी पवित्र नदियों का और तीर्थों का ध्यान करते हुए स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
संक्रांति पर सूर्य देव से जुड़ी चीजें जैसे गुड़, तांबा, लाल वस्त्र का दान करना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य से संबंधित दोष हैं, उन्हें संक्रांति के दिन सूर्य पूजा खासतौर पर करनी चाहिए। ऐसा करने से सूर्य देव के दोषों का असर कम हो सकता है।
जरूरतमंद को खाना खिलाएं। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं।
अब ठंड का असर बढ़ने लगेगा, ऐसे में जरूरतमंद लोगों को ऊनी कपड़ों का और कंबल का दान करें।
नौ ग्रहों का राजा है सूर्य
ज्योतिष में नौ ग्रह बताए गए हैं- सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु। सूर्य को इन नौ ग्रहों का राजा माना जाता है। ये ग्रह सिंह राशि का स्वामी है। यमराज, यमुना और शनिदेव सूर्य देव की संतानें हैं। यमराज और यमुना सूर्य-संज्ञा की संतानें हैं, जबकि शनिदेव सूर्य और छाया के पुत्र हैं। सूर्यदेव ने ही हनुमान जी को सभी वेदों का ज्ञान दिया था। इसलिए सूर्य को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
हेमंत ऋतु में बढ़ने लगती है ठंड
हेमंत ऋतु वर्ष की छह ऋतुओं में से एक है और हर साल नवंबर से दिसंबर महीनों में रहती है। इस समय मौसम में ठंडक बढ़ने लगती है और वातावरण में शुष्कता का अनुभव होता है। पेड़ों की पत्तियाँ झड़ने लगती हैं और सुबह-शाम की ठंडी हवा वातावरण को सुहावना बनाती हैं। इन दिनों में खान-पान और कपड़ों को लेकर सतर्कता रखनी चाहिए। ये ऋतु 15 जनवरी 2026 तक रहेगी, इसके बाद शिशिर ऋतु शुरू होगी।