लखनऊ3 मिनट पहले
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विश्वनाथ मंदिर के 34वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का दूसरा दिन शुक्रवार को संपन्न हुआ। सीतापुर रोड योजना कॉलोनी के सेक्टर-ए स्थित श्रीरामलीला पार्क में कथाव्यास आचार्य पं. गोविंद मिश्रा ने सुखदेव जी एवं महाराज परीक्षित के जन्म प्रसंग का वर्णन किया।
आचार्य पं. मिश्रा ने अपने प्रवचनों में कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का संपूर्ण मार्गदर्शन है। उन्होंने बताया कि परमज्ञानी श्री सुखदेव जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है, जिन्होंने सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर ज्ञान को ही अपने जीवन का केंद्र बनाया।
परीक्षित का उपदेश मोक्षमार्ग का संदेश
कथा में वर्णित सुखदेव जी का राजमहल में प्रवेश, राजा परीक्षित को उपदेश और मोक्षमार्ग का ज्ञान समाज को यह संदेश देता है कि भक्ति और ज्ञान का संयोजन ही मानवता को सही दिशा प्रदान करता है।
कथाव्यास ने परीक्षित जन्म प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में संकट का समय मनुष्य को उसके असली कर्तव्य और स्वरूप का बोध कराता है। उन्होंने जोर दिया कि जब मनुष्य धर्म और कर्तव्य से जुड़ा रहता है, तभी वह जीवन की हर चुनौती से पार पा सकता है।
आचार्य पं. मिश्रा ने कथा को वर्तमान समाज से जोड़ते हुए कहा कि आज की जीवनशैली में तनाव, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक विघटन और नैतिक मूल्यों में गिरावट चिंता का विषय है।ऐसे समय में भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजनों की आवश्यकता और बढ़ जाती है, क्योंकि ये हमें धर्म, आचरण और संयम के महत्व की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि सुखदेव और परीक्षित का संवाद यह दर्शाता है कि भक्ति और सदाचरण के साथ चलने वाला व्यक्ति कभी अकेला नहीं होता।

सत्संग के लिए समय निकालना आवश्यक
उन्होंने बताया कि कथा सुनने का मुख्य उद्देश्य मन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। यदि समाज को स्थिरता, शांति और संतुलन की ओर ले जाना है, तो हर व्यक्ति को धर्म, ज्ञान और सत्संग के लिए समय निकालना आवश्यक है।इस कार्यक्रम में जगत नारायण दूबे, नीरज शुक्ल, सास्वत पाठक, शेषमणि तिवारी, कान्ती पाण्डेय, कोमल तिवारी, नीलम पाण्डेय, ज्ञानवती तिवारी, सपना शुक्ला और सुशीला पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया।