Paush month till 3 January, significance of paush month, rituals about paush month in hindi | पौष मास 3 जनवरी तक: हिन्दी पंचांग का दसवां महीना है पौष, इस महीने में सूर्य पूजा के साथ करनी चाहिए दिन की शुरुआत

Actionpunjab
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23 घंटे पहले

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आज (5 दिसंबर) से हिन्दी पंचांग का दसवां महीना पौष शुरू हो गया है, ये महीना 3 जनवरी तक रहेगा। पौष मास में रोज सुबह सूर्योदय से पहले जागने, सूर्य को जल चढ़ाने और कुछ देर धूप में बैठने का विशेष महत्व है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौष शब्द का अर्थ है पोषण करना वाला महीना। इन दिनों में सुबह सूर्योदय के समय की सूर्य की रोशनी शरीर के लिए लाभदायक रहती है। कुछ देर सुबह धूप में बैठने से ऊर्जा और विटामिन डी मिलता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सूर्य से हमें स्वास्थ्य लाभ मिल सके, इसलिए पौष मास में सूर्य पूजा करने की परंपरा है।

पंचदेवों में से एक हैं सूर्य देव

पौष मास के प्रमुख देवता सूर्य हैं। सूर्य पंचदेवों में से एक हैं और एकमात्र प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले देवता हैं। पौष मास में सूर्य की पूजा करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं, समस्याओं का सामना करने की शक्ति बढ़ती है। विचार सकारात्मक होते हैं। सूर्य पूजा करने का सबसे सरल तरीका है- रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य देना। इस दौरान सूर्य मंत्र का जप भी कर सकते हैं। सुबह-सुबह सूर्य नमस्कार करेंगे तो स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा रहेगा। इन दिनों में सूर्य देव से जुड़ी चीजें जैसे गुड़, पीले वस्त्रों का दान करना चाहिए।

पौष मास में पकने लगती हैं फसलें

पौष मास किसानों के लिए बहुत खास है। इस महीने में कई फसलें पकना शुरू हो जाती हैं। पौष मास में लोहड़ी और पोंगल जैसे पर्व मनाई जाते हैं। कई बार इस महीने में मकर संक्रांति भी मनाई जाती हैं, पिछले इस साल 2024 में मकर संक्रांति पौष मास खत्म होने के बाद अगले दिन मनाई गई थी।

खान-पान का रखें ध्यान

इस महीने में ठंड अपने पूरे प्रभाव में रहती है। ठंड के दिनों में खानपान को लेकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इस मौसम में शरीर को गर्म रखने वाली चीजें खानी चाहिए। इन दिनों तिल, गुड़, मूंगफली जैसी चीजें खासतौर पर लोग अपने खाने में शामिल करते हैं, क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है। पौष मास में गजक और तिल-गुड़ के लड्डू का सेवन किया जाता है। इनके अलावा हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी, बथुआ और मौसमी फल भी आहार में शामिल करना चाहिए।

पौष मास में करें भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा

  • पौष मास भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक भी करना चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा का अभिषेक करें। दूध के बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  • इस दिनों में श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी करना चाहिए। रोज अपने समय के अनुसार इस ग्रंथ का पाठ करें और कोशिश करें कि पौष मास खत्म होने से पहले इसे पूरा पढ़ लें। ग्रंथ पढ़ने के साथ ही इसकी शिक्षाओं को जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।
  • गीता पाठ के साथ ही भगवान विष्णु और उनके अवतारों की कथाएं भी पढ़-सुन सकते हैं। किसी संत के प्रवचन सुन सकते हैं। इस महीने में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और श्रीराम के मंदिरों में दर्शन पूजन करने की भी परंपरा है।
  • पौष मास में अनाज, जूते-चप्पल, भोजन, धन, गर्म कपड़ों का दान, गुड़ और काले तिल का दान करें।
  • पौष मास में गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय पवित्र नदियों और तीर्थों का ध्यान करना चाहिए।

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