गैंगस्टर गोल्डी बरार और रोहित गोदारा से हुई दुश्मनी के बाद लॉरेंस गैंग ने राजस्थान में नया नेटवर्क एक्टिवेट कर दिया है। इसके लिए पुराने और नए बदमाशों को काम पर लगाया गया है।
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लॉरेंस के इस नेटवर्क में झारखंड और छत्तीसगढ़ में एक्टिव रहे राजस्थान के ही गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह का नाम सामने आया है। वह श्रीगंगानगर के घड़साना स्थित पुरानी मंडी का रहने वाला है।
सुनील फिलहाल झारखंड जेल में बंद है। उसे करीब 9 महीने पहले झारखंड पुलिस अजरबैजान से पकड़कर लाई है।
विदेश में बैठे आरजू विश्नोई और हैरी बॉक्सर उसकी मदद कर रहे थे। हाल ही में राजस्थान के कुछ शहरों में बड़े बिजनेसमैन को लॉरेंस गैंग की तरफ से धमकी भरे कॉल आए। पुलिस इन्वेस्टिगेशन और लॉरेंस गैंग से जुड़े कुछ बदमाशों की गिरफ्तारी से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, विदेशी नंबरों से किए गए इन धमकी भरे कॉल्स के पीछे सुनील मीणा का ही हाथ है।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

सोशल मीडिया पर हथियारों की नुमाइश कर रहा सुनील मीणा श्रीगंगानगर के घड़साना का रहने वाला है।
अजमेर के बिजनेसमैन से मांगे 2 करोड़ अजमेर के बिजनेसमैन यशवंत शर्मा (58) ने पुलिस को रिपोर्ट दी थी। उन्होंने कहा था- अजमेर के माखुपुरा औद्योगिक क्षेत्र में उनकी श्रीभगवती मशीन के नाम से कंपनी है। 29 नवंबर 2025 को उन्हें वॉट्सऐप कॉल आया, जिसे उन्होंने अनजान नंबर होने के कारण रिसीव नहीं किया। बाद में उसी नंबर से उन्हें वॉट्सऐप मैसेज आया।
मैसेज में लिखा था- लगता है कि आपके कानों में कोई दिक्कत है। तभी हमारी कॉल की रिंग सुनाई नहीं दे रही है। गोली चलाकर आपके कान साफ करने ही पड़ेंगे।
इसके बाद एक और मैसेज आया- आपको हमारे बारे में कोई गलतफहमी हो रही है। ठीक है। अब आपको कोई कॉल नहीं करेंगे। सीधा आपके सीने में गोली मारेंगे या फिर आपके परिवार में किसी को गोली मारेंगे। उसके बाद ही आपको फोन करेंगे।
मैसेज में यह भी लिखा था कि भगवती मशीन टूल्स से आपने बहुत पैसा कमा लिया है और अब आपसे पैसा कमाने की हमारी बारी है। मेरे को आपसे 2 करोड़ रुपए चाहिए। अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो सीधे ऊपर जाने की तैयारी कर लेना।
भास्कर पड़ताल में सामने आया कि ऐसा ही एक धमकी भरा मैसेज अजमेर शहर के ही एक और सट्टा कारोबारी को भी मिला था। हालांकि उसने पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी थी।
पुलिस ने मैसेज की जांच की तो उसमें लॉरेंस गैंग की धमकी में नीचे लिखे गए गैंगस्टरों के नामों में एक नाम नया था- सुनील मीणा।

करीब 9 महीने पहले सुनील मीणा को अजरबैजान से गिरफ्तार कर लाया गया था।
पांच करोड़ नहीं दिए तो पेट्रोल पंप पर फायरिंग इससे पहले अजमेर में लॉरेंस गैंग के बदमाशों ने 20 अक्टूबर 2021 को कचहरी रोड स्थित पेट्रोल पंप पर फायरिंग की थी। फरीदाबाद जेल में बंद भूपेंद्र सिंह ने सोशल साइट्स पर एक पोस्ट कर इस वारदात की जिम्मेदारी ली थी।
पंप मालिक के बेटे नमन गर्ग ने पुलिस को बताया था कि 2 दिन से उसे धमकी भरे फोन आ रहे थे। उसने फोन नहीं उठाया तो उसके ताऊजी को फोन किया गया। करीब 5 करोड़ की डिमांड की जा रही थी। रकम नहीं देने और फोन नहीं उठाने के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया।
इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई कर लच्छीपुरा, अजमेर निवासी नरेन्द्र सिंह उर्फ मोनू रावत (28), सारण पाली निवासी पप्पू सिंह उर्फ पप्सा रावत (28) व फरीदकोट जेल में बंद भूपेंद्र सिंह खरवा को पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया था कि ये सभी बदमाश गैंगस्टर सुनील मीणा के संपर्क में हैं। उसी के माध्यम से वो लॉरेंस गैंग के लिए काम कर रहे थे।

फिरौती नहीं देने पर 20 अक्टूबर 2021 को अजमेर के पेट्रोल पंप पर फायरिंग की गई थी।
मलेशिया से चला रहा था लॉरेंस का नेटवर्क ये सब कुछ सामने आने के बाद पुलिस ने न सिर्फ लॉरेंस व संदीप मीणा से जुड़े बदमाशों की धरपकड़ शुरू कर दी, बल्कि उनकी मौजूदा मूवमेंट को ट्रैक करना स्टार्ट कर दिया। पुलिस ने ये पता भी लगा लिया कि अजमेर में व्यापारी को मिले कॉल के पीछे कभी मलेशिया से लॉरेंस का नेटवर्क चलाने वाले संदीप मीणा और राहुल का ही दिमाग था।
इसी दौरान पुलिस ने भूपेन्द्र सिंह खरवा (33), दीपक सिंह उर्फ दीपसा (29), राहुल सिंह (20) और नरेन्द्र सिंह गहलोत उर्फ मोनू (36) को पकड़ लिया।
इनसे हुई पूछताछ में ये कन्फर्म हो गया कि लॉरेंस गैंग की तरफ से राजस्थान में बिजनेसमैनों को फिरौती केे लिए धमकी भरे कॉल के पीछे झारखंड की जेल में बंद सुनील मीणा ही है। गिरफ्तार किए गए बदमाश बड़ी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी में भी थे। इन आरोपियों के खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं।

अजरबैजान से पहले सुनील मलेशिया से लॉरेंस का नेटवर्क चला रहा था।
दो नाम से पहचान पत्र सुनील मीणा ने पुलिस और सिक्योरिटी एजेंसीज से बचने के लिए मयंक सिंह और सुनील मीणा नाम से दो पहचान बना रखी थी। झारखंड और छत्तीसगढ़ की पुलिस एक ही शख्स द्वारा की गई वारदातों के मामले में 2 अलग-अलग शख्स को तलाश रही थी। बाद में जांच में सामने आया था कि मयंक और सुनील एक ही हैं, जो मलेशिया में बैठ कर झारखंड के गैंगस्टर अमन साहू और लॉरेंस विश्नोई के बीच मेन कड़ी बना हुआ है।
इसी साल 11 मार्च को झारखंड के पलामू में एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में अमन साहू मारा गया था। इससे पहले 28 अक्टूबर 2024 को गैंगस्टर सुनील मीणा को इंटरपोल की मदद से अजरबैजान में पकड़ लिया गया था।
इसके बाद 23 अगस्त 2025 को सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह को अजरबैजान से प्रत्यर्पण कर रांची लाया गया था। फिलहाल वो झारखंड के रामगढ़ जिले की जेल में बंद है।
सुनील मीणा उर्फ़ मयंक सिंह पर झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 50 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। अधिकतर मामले झारखंड और छत्तीसगढ़ के ही हैं।

सुनील मीणा ने मयंक सिंह के नाम से भी पहचान पत्र बना लिया था। काफी समय तक इसी वजह से पुलिस को धोखा देता रहा था।
9वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी झारखंड पुलिस की पूछताछ में सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह ने तमाम बातें बताईं। उसके पिता मंगतराम दिहाड़ी मजदूर हैं।
साल 2014 में उसने 9वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। घरवालों के दबाव देने पर दोबारा 10वीं में एडमिशन लिया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही वह एक डीजे में काम करने लगा।
पहली बार लॉरेंस से उसकी मुलाकात मोहाली के एक कॉलेज में हुई थी। हालांकि उसके बाद दोनों की कोई बातचीत नहीं हुई थी और न ही दोनों बाद में संपर्क में रहे।
इस बीच साल 2019 में सुनील को पता चला कि गांव का ही राहुल कुमार मलेशिया में रहता है और वह वहां काफी पैसा कमाता है।
ज्यादा पैसा कमाने के लालच में ही वह राहुल के माध्यम से पासपोर्ट बनवाकर मलेशिया चला गया। वहां जुली फार्मा कंपनी में 65 हजार प्रति महीने वेतन पर काम करने लगा। इसी दौरान वहां मंदीप सिंह से संपर्क हुआ।
मंदीप के जरिए हैरी और उसके जरिए लॉरेंस से सपंर्क मंदीप ने ही हैरी से उसका संपर्क कराया। हैरी के माध्यम से ही दोबारा सुनील मीणा लॉरेंस के संपर्क में आया। उसके बाद उसने अनमोल बिश्नोई और गोल्डी बरार समेत अन्य लोगों से बातचीत शुरू कर दी।
लॉरेंस ने उसे सऊदी अरब में ट्रक चलाने वाले राकेश कुमार से संपर्क करने को कहा। राकेश से जब संपर्क किया तो पता चला कि वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। राकेश ने ही लॉरेंस के कहने पर सुनील की झारखंड के बड़े गैंगस्टर अमन साहू से बात कराई।
अमन ने बातचीत के दौरान सुनील को उसके लिए काम करने को कहा। अमन ने सुनील को बताया था कि उसे जो मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा, उस पर फोन व मैसेज भेज कर खुद को मयंक सिंह बताते हुए रंगदारी मांगना है।
कहे अनुसार, सुनील धमकी भरे कॉल और मैसेज करने लगा। अमन ने ही सुनील को नया नाम मयंक सिंह दिया था। वो सुनील मीणा से मयंक सिंह बन गया। इसके साथ ही वह अमन साहू व लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए एक कड़ी का काम करने लग गया था।

पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई में भी सुनील मीणा का अहम रोल था।
पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई में लॉरेंस का बड़ा राजदार पूछताछ में ये भी सामने आया था कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में साहू गैंग के सदस्य कोयला कारोबारी, ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर, जमीन कारोबारी सहित अन्य लोगों से रंगदारी वसूलते थे। इसके बाद ये रंगदारी की रकम झारखंड से हवाला के जरिए अमन साहू गैंग यूरोप भेजता था।
यूरोप से ये रकम हवाला के माध्यम से मलेशिया और थाइलैंड में जगह बदल-बदलकर रहने वाले सुनील मीणा उर्फ़ मयंक सिंह तक पहुंचती थी। सुनील मीणा रंगदारी की ये रकम मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर स्थित पाक-पंजाब नामक रेस्टोरेंट के एक कर्मचारी के पास पहुंचाता था।
इसके बाद वो कर्मचारी इस रकम को पाकिस्तान में हथियार बेचने वाले एजेंट तक पहुंचाता था। रकम मिलने के बाद एजेंट अपने गुर्गों के जरिये अमन साहू गैंग तक हथियारों की सप्लाई कराता था।
सुनील मीणा साल 2023 में 15 दिनों के लिए मलेशिया से वापस लौटकर राजस्थान स्थित अपने घर आया था। इसके बाद वो वापस मलेशिया गया तो जूली फार्मा ने काम पर नहीं रखा। इसी दौरान उसे लॉरेंस गैंग से पता चला कि झारखंड एटीएस रांची ने उसका इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया है।
इसके बाद वह अमन के इशारे पर पहले थाईलैंड और इसके बाद थाईलैंड से अजरबैजान गया। उसने अपने गांव के दोस्त राहुल को भी अरबैजान बुला लिया। इसके बाद अक्टूबर 2024 में अजरबैजान में इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया था।