The lawyer said that the matter arose due to misunderstanding. | थाने में वकील से बदसलूकी विवाद सुलझा: आपसी बातचीत के बाद बनी सहमति, आरोप पर कोर्ट ने एसपी को किया था तलब – Jalore News

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एएसपी कार्यालय में पुलिस के साथ वार्ता करते हुए वकील।

जालोर जिले में 16 दिसंबर की रात दर्ज गुमशुदगी रिपोर्ट के मामले में बयान दर्ज कराने पहुंचे वकील के साथ कथित बदसलूकी को लेकर उठा विवाद सोमवार शाम को समाप्त हो गया। अभिभाषक संघ के नेतृत्व में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई आपसी वार्ता के बाद दोनो

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दरअसल, गुजरात में दर्ज एमपीआर मामले से जुड़े गुमशुदा गुजरात निवासी अपने क्लाइंट के बयान दर्ज कराने के लिए वकील तुलसीराम पुरोहित जालोर कोतवाली थाने पहुंचे थे। इस दौरान कोतवाली थानाधिकारी (सीआई) रामेश्वर लाल भाटी पर वकील के साथ धक्का-मुक्की, बदसलूकी करने, कॉलर से पकड़कर थाने से बाहर ले जाने और धमकाने के आरोप लगे। इस घटना से नाराज होकर अभिभाषक संघ के नेतृत्व में वकीलों ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश (डीजे) दिनेश कुमार गुप्ता से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी।

पुलिस के साथ वार्ता करने के बाद बाहर आते हुए वकील

पुलिस के साथ वार्ता करने के बाद बाहर आते हुए वकील

डीजे ने एसपी को किया तलब, जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने जालोर एसपी शैलेन्द्र सिंह को तलब किया और पूरे प्रकरण की जांच कर सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस प्रशासन और वकीलों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हुई।

एएसपी कार्यालय में हुई वार्ता, 45 मिनट चली बातचीत

सोमवार शाम करीब 6 बजे एएसपी कार्यालय में जालोर एएसपी मोटाराम, डीएसपी गौतम जैन और कोतवाल अरविंद कुमार भाटी के साथ अभिभाषक संघ अध्यक्ष खसाराम के नेतृत्व में वकीलों की बैठक हुई। करीब 45 मिनट तक चली इस बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी, जिसके बाद आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकाल लिया गया।

वार्ता के बाद मीडिया से बात करते पीड़ित वकील

वार्ता के बाद मीडिया से बात करते पीड़ित वकील

पीड़ित वकील बोले–गलतफहमी से हुआ मामला

पीड़ित वकील तुलसीराम पुरोहित ने बताया कि यह पूरा मामला कुछ उनकी ओर से और कुछ कोतवाल रामेश्वर लाल की ओर से हुई आपसी गलतफहमी के चलते हुआ। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर को कोतवाली थाने में हुई घटना में वे स्वयं अपना परिचय स्पष्ट रूप से एडवोकेट के रूप में नहीं दे पाए और कोतवाल भी पहचान नहीं कर पाए, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

उन्होंने कहा कि अब आपसी वार्ता के बाद मामला पूरी तरह शांत हो गया है और किसी तरह का कोई विवाद शेष नहीं है। पुलिस प्रशासन और अभिभाषक संघ ने भी भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने, इसके लिए आपसी समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई है।

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