नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अरावली मामले में राज्य और केंद्र सरकार पर तंज कसा है। जूली ने कहा कि राजस्थान की बेशकीमती प्राकृतिक संपदा को कॉपोर्रेट घरानों के हाथों लूटने का बड़ा षड्यंत्र है। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि अरावली का कुछ नहीं बिगड़ने दूंग
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जूली ने कहा- सरिस्का क्षेत्र की 50 से अधिक बंद पड़ी खदानों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों से खिलवाड़ किया गया। भूपेंद्र यादव ने उन माइन्स को राहत देने के लिए सरिस्का का क्रिटिकल टाइगर हेबिटेट (CTH) एरिया ही बदलवा दिया था। यह तो शुक्र है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फटकार लगाई। इसके बाद अब आनन-फानन में आपत्तियां मांगी जा रही हैं।
जूली ने कहा- मंत्री भूपेंद्र यादव 0.19% क्षेत्र प्रभावित होने का तर्क दे रहे हैं। यह 0.19% का छोटा दिखने वाला आंकड़ा असल में 68,000 हेक्टेयर का विशाल क्षेत्र है। इतने बड़े पैमाने पर खनन से राजस्थान के पर्यावरण, जल स्तर और वन्यजीवों का जो विनाश होगा, उसकी भरपाई नामुमकिन है।

सरकार पूंजीपतियों की सेवा में जुटी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- राज्य सरकार की मिलीभगत से राजस्थान की खनिज संपदा को पूंजीपतियों को सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जनता को यह बताएं कि दिल्ली से थोपे जा रहे इन खनन कानूनों पर वह राजस्थान के हित में रोक कैसे लगाएंगे?