रोहित सिंह | सिद्धार्थनगर6 मिनट पहले
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माधव प्रसाद तिवारी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. जितेंद्र सिंह ने बढ़ती ठंड और मौसम में अचानक हो रहे बदलाव पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि तापमान में गिरावट के साथ ही हार्ट, सांस और वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। ठंड का असर विशेष रूप से बुजुर्गों, पहले से बीमार व्यक्तियों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर अधिक पड़ रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, ठंड में रक्त नलिकाएं सिकुड़ने से रक्तचाप बढ़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। ठंडी हवा के कारण अस्थमा, सीओपीडी और अन्य सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों को भी सांस लेने में अधिक परेशानी हो रही है। अस्पताल की एसयूपी और इमरजेंसी में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और सांस फूलने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

डॉ. सिंह ने बताया कि जहां ओपीडी में मरीजों की संख्या में कमी आई है, वहीं इमरजेंसी में गंभीर रोगियों का दबाव काफी बढ़ गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि लोग ठंड को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, उनकी स्थिति अचानक बिगड़ जाती है और उन्हें आपातकालीन उपचार के लिए अस्पताल आना पड़ता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल फीवर के मरीज भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। ठंड के साथ-साथ कोहरा और नमी बढ़ने से वायरस को फैलने के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है। खांसी, जुकाम, बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसे लक्षण अब आम हो गए हैं। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।