मंडी सचिव नरेश मान की फाइल फोटो।
करनाल की घरौंडा अनाज मंडी में वर्ष 2022-2023 के दौरान धान खरीद, परिवहन और कस्टम मिलिंग के नाम पर 2.56 करोड़ रुपए के घोटाले का मामला सामने आया है। जांच में सामने आया कि अनाज मंडी से धान को राइस मिलों तक पहुंचाने के लिए मोटरसाइकिल और कार जैसे छोटे वाहन
.
जांच का पूरा घटनाक्रम और स्वीकृतियां मामले की शुरुआत मुख्य सचिव हरियाणा सरकार और महानिदेशक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला के स्तर से प्राप्त पत्रों के आधार पर हुई थी। प्रारंभिक जांच रजिस्टर होकर पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो करनाल मंडल के कार्यालय से निरीक्षक सीमा को सौंपी गई थी। बाद में आदेशानुसार सब इंस्पेक्टर अरविन्द कुमार को जांच दी गई। जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार कर पुलिस अधीक्षक करनाल मंडल के माध्यम से महानिदेशक कार्यालय पंचकूला भेजी गई। रिपोर्ट के अवलोकन के बाद मुख्य सचिव हरियाणा सरकार ने निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और मामला दर्ज करने की अनुमति दी।

घरौंडा के पूर्व मार्किट सचिव नरेश मान की फाइल फोटो।
धान खरीद का आंकड़ा और एजेंसियां जांच में सामने आया कि वर्ष 2022-2023 के दौरान अनाज मंडी घरौंडा में कुल 17,88,087.68 क्विंटल धान की खरीद दिखाई गई। इसमें -डीएफएससी के माध्यम से 10,63,864.50 क्विंटल, -हैफेड के माध्यम से 2,70,293.56 क्विंटल, -एचएसडब्ल्यूसी के माध्यम से 4,53,929.62 क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई। इस पूरी खरीद के बाद धान को कस्टम मिलिंग के लिए संबंधित राइस मिलों में भेजा जाना दर्शाया गया।
फर्जी वाहनों से धान ढुलाई का खेल ई-खरीद पोर्टल और जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार कस्टम मिलिंग के लिए धान जिन वाहनों से भेजी गई, वे वास्तव में भारी ढुलाई के योग्य ही नहीं थे। जांच में जिन वाहनों के नंबर सामने आए, उनमें -एचआर91ए-6169 (स्प्लेंडर मोटरसाइकिल), -एचआर05एवी-7877 (ऑल्टो कार), -एचआर79-2245 (मोटरसाइकिल), -एचआर12एआर-4993 (पल्सर मोटरसाइकिल) शामिल थे। इन हल्के वाहनों के नाम पर हजारों क्विंटल धान की ढुलाई दिखाना जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया।

करनाल एसीबी कार्यालय की फोटो।
किन राइस मिलों को दिखाई गई ढुलाई रिकॉर्ड के अनुसार इन वाहनों के जरिए घरौंडा अनाज मंडी से कस्टम मिलिंग के लिए -गिरिराज ओवरसीज राइस मिल घरौंडा को 5608.875 क्विंटल, -रिद्धि सिद्धि और नंदलाल राइस मिल घरौंडा को 595.125 क्विंटल, -नंदलाल ओवरसीज घरौंडा को 360.75 क्विंटल, -लक्ष्मी और गिरिराज ओवरसीज राइस मिल घरौंडा को 5063.625 क्विंटल धान भेजी गई दिखाई गई। कुल मिलाकर 11,628.38 क्विंटल धान की ढुलाई कागजों में दर्ज की गई।
मिलिंग और चावल आपूर्ति का दावा नियमों के अनुसार कस्टम मिलिंग के बाद 67 प्रतिशत चावल भारतीय खाद्य निगम को दिया जाना था। जांच में पाया गया कि कागजों में यह प्रक्रिया पूरी दिखाई गई, लेकिन ढुलाई के लिए जिन वाहनों का उपयोग दर्शाया गया, वे वास्तविकता में इस कार्य के लिए कभी इस्तेमाल ही नहीं हुए।
वाहन मालिकों के बयान से खुली पोल जांच अधिकारी ने संबंधित एसडीएम कार्यालय और वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड से जानकारी जुटाई। जिन वाहनों के नंबर इस्तेमाल किए गए, उनके असली मालिकों को जांच में शामिल किया गया। गांव फरीदपुर निवासी इन्द्रजीत, गांव ठसका मोरा जी कुरुक्षेत्र निवासी गुरलाल सिंह, गांव कालरम निवासी सुशील कुमार ने बयान दिए कि उनके वाहनों का कभी भी घरौंडा अनाज मंडी से धान ढुलाई में उपयोग नहीं हुआ और न ही उन्हें किसी तरह का किराया मिला। इससे यह साफ हो गया कि वाहन नंबरों का फर्जी इस्तेमाल कर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई।
ट्रांसपोर्टर और मिल मालिकों की मिलीभगत जांच में ट्रांसपोर्टर मैसर्ज सुखदेव एंड कम्पनी और राइस मिल -गिरिराज ओवरसीज कैमला रोड घरौंडा, -रिद्धि सिद्धि ओवरसीज गांव कुटेल घरौंडा, -नंदलाल ओवरसीज घरौंडा, -लक्ष्मी राइस मिल घरौंडा के मालिकों की भूमिका भी सामने आई। आरोप है कि सभी ने मिलकर फर्जी ढुलाई, फर्जी मिलिंग और कागजी आपूर्ति दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

घरौंडा मंडी से धान की लिफ्टिंग करते वाहन।
कितनी रकम का गबन जांच के अनुसार 11,628.38 क्विंटल धान की कीमत एमएसपी और इंसिडेंटल रेट 2210 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब 2,56,98,708 रुपए बैठती है। यही राशि सरकारी नीतियों के खिलाफ फर्जीवाड़े से गबन की गई।
एफआईआर और आगे की जांच सभी तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो करनाल मंडल में मामला दर्ज किया गया। प्रकरण दर्ज होने के बाद एफआईआर की कंप्यूटरीकृत प्रतियां तैयार कर उच्च अधिकारियों और न्यायालय को भेजी गईं। मामले की आगे की जांच के लिए निरीक्षक प्रवीण कुमारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नामजद आरोपी मामले में घरौंडा निवासी तत्कालीन सचिव मार्केट कमेटी नरेश मान, घरौंडा उप केंद्र में तैनात तत्कालीन निरीक्षक खाद्य एवं आपूर्ति विभाग संदीप कुमार, ट्रांसपोर्टर मैसर्ज सुखदेव एंड कम्पनी, रिद्धि सिद्धि ओवरसीज राइस मिल कुटेल, गिरिराज ओवरसीज राइस मिल कैमला रोड घरौंडा, नंदलाल ओवरसीज राइस मिल घरौंडा, लक्ष्मी राइस मिल घरौंडा को आरोपी बनाया गया है।
सरकारी सिस्टम पर सवाल इस घोटाले ने धान खरीद, परिवहन और मिलिंग की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ई-खरीद पोर्टल, आउटगेट पास और विभागीय निगरानी के बावजूद फर्जीवाड़ा सामने आना व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। अब सतर्कता ब्यूरो की कार्रवाई के बाद उम्मीद है कि पूरे नेटवर्क की परतें खुलेंगी और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।