Putrada Ekadashi fast on 30th December, significance of putrada ekadashi, Shiv puja vidhi, vishnu puja vidhi | 30 दिसंबर को एकादशी व्रत: मंगलवार और एकादशी के योग में करें भगवान विष्णु और मंगल ग्रह की पूजा, शिवलिंग पर चढ़ाएं लाल गुलाल

Actionpunjab
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13 घंटे पहले

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आस (मंगलवार, 30 दिसंबर) साल की आखिरी एकादशी (पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी) है। ये व्रत संतान से जुड़ी समस्याएं दूर करने की कामना से किया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। एकादशी व्रत करने वाले अधिकतर भक्त दिनभर निराहार रहते हैं, जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार और दूध का सेवन करते हैं। इस बार मंगलवार और एकादशी के योग में भगवान विष्णु के साथ ही मंगल ग्रह की भी पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, महाभारत में पुत्रदा एकादशी के बारे में बताया गया है। पौराणिक कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत का महत्व धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। भगवान ने कहा था कि पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से भक्त के सभी पाप नष्ट होते हैं। ये व्रत दीर्घायु और संस्कारी संतान देने वाला है।

एकादशी पर कर सकते हैं ये शुभ काम

पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी पूजन करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान की प्रतिमाओं को स्नान कराएं। दूध के बाद जल से स्नान कराएं। पूजा में फल-फूल, गंगाजल, धूप दीप और प्रसाद आदि अर्पित करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें। पूजा में विष्णु जी के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जप कम से कम 108 बार करें। विष्णु जी की कथाएं पढ़ें और सुनें। अगले दिन यानी द्वादशी पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं, दक्षिणा दें। इसके बाद खुद भोजन ग्रहण करें। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।

मंगलवार और एकादशी के योग में हनुमान जी के सामने धूप-दीप जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। श्रीराम की पूजा करें। ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें।

ज्योतिष में मंगलवार का कारक ग्रह मंगल को माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह से संबंधित दोष हैं, उन्हें मंगलवार को शिवलिंग पर लाल गुलाल और लाल मसूर की दाल चढ़ानी चाहिए। मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में ही की जाती है, इसलिए मंगल दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करनी चाहिए।

एकादशी से जुड़ी ये है कथा

पौराणिक कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत का महत्व धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। भगवान ने कहा था कि पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से भक्त के सभी पाप नष्ट होते हैं। ये व्रत दीर्घायु और संस्कारी संतान देने वाला है।

भगवान ने आगे कहा कि पहले के समय में भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चंपा था। इनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए वे दुखी रहते थे। इसी दुख की वजह से एक दिन राजा सुकेतुमान वन की ओर निकल पड़े।

वन में जब राजा को प्यास लगी, तो वे एक सरोवर के पास पहुंचे। वहां राजा को कई ऋषि-मुनि दिखाई दिए, राजा ने सभी को प्रणाम किया और अपनी समस्या बताई। तब मुनियों ने बताया कि पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने से योग्य संतान प्राप्त होती है। मुनियों की आज्ञा मानकर राजा सुकेतुमान ने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। कुछ ही समय बाद रानी चंपा ने एक पुत्र को जन्म दिया।

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