करनाल जिले में साइबर ठगों ने आईजीएल के नाम पर फर्जी कॉल और वॉट्सऐप लिंक भेजकर एक व्यक्ति का मोबाइल हैक कर लिया। इसके बाद बैंक खातों तक पहुंच बनाकर एफडी तुड़वाकर लाखों रुपए अलग-अलग बैंकों के क्रेडिट कार्ड भुगतान में निकाल लिए गए। पीड़ित को किसी भी स्त
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आईजीएल कर्मी बनकर की कॉल
करनाल के ओमप्रकाश के मोबाइल पर 3 जनवरी को 1:54 बजे कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को आईजीएल से बताया और कहा कि पिछली बिल पेमेंट अपडेट नहीं हुई है, इसलिए बीपी नंबर अपडेट कराना होगा। पीड़ित ने मना किया, लेकिन कनेक्शन कटने का डर दिखाकर बातों में उलझाया गया। इसके बाद वॉट्सऐप पर भेजे लिंक पर क्लिक कराया गया।

बैंक खाते से निकाली पैसों की स्टेटमेंट दिखाता पीड़ित।
लिंक भेजकर मोबाइल पर नियंत्रण
लिंक पर क्लिक करते ही आईजीएल के नाम की एपीके फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हो गई। इसके तुरंत बाद कॉल करने वाले ने आईसीआईसीआई बैंक करनाल के खाते का नंबर और नाम पूछकर कॉल काट दी। कुछ ही देर में पीड़ित के मोबाइल पर इंडसइंड बैंक की मोबाइल एप पर एम पिन जनरेट होने का संदेश आया, जबकि पीड़ित किसी बैंक एप का उपयोग नहीं कर रहा था।
फर्जी संदेश मानकर किया नजरअंदाज
करीब 3:15 बजे आए संदेश के बाद पीड़ित ने बैंक कर्मचारी हिमांशु से संपर्क किया। बातचीत में इसे सामान्य फर्जी संदेश बताकर चिंता न करने की बात कही गई। इसी बीच ठग मोबाइल पर पूरी तरह सक्रिय रहे और बैंकिंग गतिविधियों को अंजाम देते रहे।

शाम को खुली पोल, एफडी तुड़वाकर रकम उड़ाई
करीब 6:30 बजे मोबाइल चेक करने पर खाते से पैसे कटने के संदेश दिखे। जांच में सामने आया कि इंडसइंड बैंक में मौजूद तीन एफडी तुड़वाकर रकम खाते में डाली गई और तुरंत अलग-अलग बैंकों के क्रेडिट कार्ड भुगतान के जरिए निकाल ली गई। पहली एफडी से 586005.77 रुपए, दूसरी एफडी से 398524.97 रुपए व तीसरी एफडी से 1218188.39 रुपए निकाले गए।
ओटीपी या एम पिन सांझा नहीं किया
पीड़ित का कहना है कि इस दौरान न तो कोई ओटीपी साझा किया गया और न ही एम पिन बताया गया। एफडी टूटने को लेकर बैंक की ओर से कोई कॉल भी नहीं आई। कुल मिलाकर 22 लाख 60 हजार 626 रुपए की ठगी की गई। घटना के बाद पीड़ित ने उसी दिन ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज की। साथ ही इंडसइंड बैंक के कस्टमर केयर में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद साइबर क्राइम थाना करनाल में लिखित शिकायत दी गई।

करनाल साइबर क्राइम थाना।
जांच अधिकारी को सौंपी फाइल
थाने में शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल गतिविधियों और बैंकिंग ट्रांजेक्शनों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़ित ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और रकम वापस दिलाने की मांग की है।