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जिले की कृषि उपज मंडी में किसानों की मेहनत पर डाका डालने वाला एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। मंडी में मूंग और मूंगफली की तुलाई के नाम पर ठेकेदार और दलालों द्वारा किसानों से अवैध वसूली की जा रही थी। जानकारी के अनुसार, यहां फसल बेचने आने वाले किसानों से
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राजनेता के हस्तक्षेप के बाद उजागर हुआ खेल
यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब एक रसूखदार राजनेता के रिश्तेदार ने इस अवैध वसूली की शिकायत की। सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामनारायण सांखला मौके पर पहुंचे और घेराबंदी कर एक दलाल को दबोच लिया। हालांकि, इस दौरान एक अन्य संदिग्ध अपनी पिकअप गाड़ी लेकर भागने में सफल रहा। दलाल के पकड़े जाते ही बड़ी संख्या में पीड़ित किसान वहां जमा हो गए और अपना आक्रोश व्यक्त किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम गोविंद भींचर, भाजपा जिलाध्यक्ष रामधन पोटलिया और कोतवाली थानाधिकारी भारी पुलिस जाब्ते के साथ मंडी पहुंचे और स्थिति को संभाला।
नोट गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मशीनें
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में जब पकड़े गए दलाल की तलाशी ली गई, तो उसके पास से नोटों के बंडल बरामद हुए। नकदी की मात्रा इतनी अधिक थी कि मौके पर दो नोट गिनने वाली मशीनें मंगवानी पड़ीं। लंबी गणना के बाद आरोपी के पास से कुल 25 लाख 300 रुपये की राशि जब्त की गई है। पुलिस ने बरामद रकम को कब्जे में लेकर एक आरोपी को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है कि यह पैसा किन-किन लोगों में बांटा जाना था।
अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
मंडी में लंबे समय से चल रहे इस खेल ने कोआपरेटिव सोसाइटी और मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि अधिकारियों की शह के बिना इतने बड़े स्तर पर वसूली संभव नहीं है। फिलहाल कोआपरेटिव इंस्पेक्टर और आला अधिकारियों ने कोतवाली पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि भ्रष्टाचार के इस तार में और कौन-कौन से सफेदपोश और अधिकारी शामिल हैं। प्रशासन ने किसानों को पारदर्शी तुलाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन इस खुलासे ने मंडी की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है।