ट्रम्प बोले- कनाडा को खा जाएगा चीन:हमारे बजाय चीन से संबंध बढ़ा रहा; कनाडा के गोल्डन-डोम प्रोजेक्ट का विरोध करने पर भड़के

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि चीन कनाडा को एक साल के अंदर ही खा जाएगा। दरअसल, कनाडा के PM मार्क कार्नी ट्रम्प के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प इससे नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा हमारे बजाए चीन से दोस्ती बढ़ा रहा, जो उन्हें पहले ही साल में बर्बाद कर देगा। कनाडा पर आरोप लगाते हुए ट्रम्प ने कहा कि वह उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है। यह विवाद तब और तेज हो गया जब कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा की और वहां व्यापार समझौते किए। इनमें कनाडाई कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करना और चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोटा शामिल है। ट्रम्प बोले- कनाडा अमेरिका के कारण जिंदा है डेवोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) पर गुरुवार को ट्रम्प ने अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा, कनाडा को अमेरिका से बहुत सारे फायदे मिलते हैं, उन्हें आभारी होना चाहिए। ट्रम्प ने कार्नी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कनाडा अमेरिका के कारण जीवित है। अगली बार जब तुम बयान दोगे तो यह याद रखना मार्क। दरअसल ट्रम्प कार्नी के एक बयान से नाराज हो गए थे। कार्नी ने 20 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा था कि अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। कार्नी बोले- अपनी वजह से फल-फूल रहे कार्नी ने 22 जनवरी को फिर ट्रम्प को का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा- कनाडा और अमेरिका ने अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में शानदार पार्टनरशिप निभाई है। लेकिन कनाडा अमेरिका के कारण नहीं जीवित है। कनाडा अपने कनाडाई होने के कारण फल-फूल रहा है। इस बयान के बाद ट्रम्प ने कार्नी से गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता भी वापस ले लिया। पहले भी आमने-सामने आ चुके ट्रम्प-कार्नी मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बढ़ता तनाव नया नहीं है। पहले भी दोनों नेता कई मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं। पिछले हफ्ते ग्रीनलैंड को लेकर कार्नी ने ट्रम्प को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला अमेरिका नहीं कर सकता और यह अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क का है। कार्नी ने उस समय अमेरिका समेत नाटो के सभी सहयोगी देशों से अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करने की अपील की थी और साफ किया था कि कनाडा डेनमार्क की संप्रभुता के साथ खड़ा है। कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। कनाडा अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर रहा कनाडा ने अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिशें शुरू कर दी थी। वे अब चीन के साथ व्यापार बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका की तरफ से कनाडा पर सीधा सैन्य हमला होना मुश्किल है, लेकिन आर्थिक दबाव डाला जा सकता है। कार्लेटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर स्टेफनी कार्विन ने कहा कि अमेरिका अब पहले से ज्यादा आसानी से कनाडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर ट्रम्प के दबदबे के बाद यह साफ है कि अमेरिका वेस्टर्न हेमिस्फेयर में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए ज्यादा आक्रामक हो सकता है। कनाडा और चीन ने ट्रेड, एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में समझौते किए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा गए थे। यह चार दिन की आधिकारिक यात्रा थी, जिसमें उन्होंने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और 16 जनवरी 2026 को व्यापार समझौते की घोषणा की गई। यह 2017 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली प्रमुख यात्रा थी। इसका मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना, व्यापार, ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में नई साझेदारी बनाना था। इसे स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का हिस्सा बताया गया। इस समझौते के तहत कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर लगे 100% टैरिफ को घटाकर 6.1% (मोस्ट-फेवर्ड-नेशन रेट) कर दिया है। फिलहाल सालाना केवल 49,000 वाहनों तक सीमित कोटा लागू किया गया है। क्या है ट्रम्प का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट, जिसका कनाडाई PM ने विरोध किया अमेरिका ने इजराइल के आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तर्ज पर अपना डिफेंस सिस्टम गोल्डन डोम बनाने का फैसला किया है। ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के एक हफ्ते बाद ही गोल्डन डोम प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। यह प्रोजेक्ट करीब 175 अरब डॉलर (लगभग 14-15 लाख करोड़ रुपये) का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्डन मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए 1200 से ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च करने की योजना बनाई गई है। इसकी मदद से अमेरिका दुश्मन मिसाइलों का अंतरिक्ष में ही पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की तैयारी कर रहा है। इनमें 400 से 1000 सैटेलाइट्स दुश्मन मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए तैनात किए जाएंगे। वहीं, लगभग 200 इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स उन मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही मार गिराने के लिए तैयार की जाएंगी। यह डिफेंस सिस्टम दुनिया के किसी भी हिस्से से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगा। ट्रम्प ने दावा किया है कि गोल्डन डोम अंतरिक्ष से हुए हमलों को भी रोकने के काबिल होगा। इसमें सर्विलांस सैटेलाइट और इंटरसेप्टर सैटेलाइट दोनों शामिल होंगे। ट्रम्प ने जनवरी में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था। उन्होंने कहा है कि यह सिस्टम 2029 तक काम करने लगेगा। प्रोजेक्ट की कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के वरिष्ठ जनरल माइकल ग्यूटलेन को सौंपी गई है। ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर चर्चा जारी ट्रम्प ने गुरुवार को ट्रुथ पर लिखा कि ग्रीनलैंड से जुड़े गोल्डन डोम मामले पर और चर्चा जारी है। आगे की जानकारी जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, उपलब्ध कराई जाएगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश सचिव मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अन्य जिम्मेदार लोग बातचीत करेंगे और सीधे मुझे रिपोर्ट करेंगे। गोल्डन डोम अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट है। यह इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित है। गोल्डन डोम का मकसद चीन, रूस जैसे देशों से आने वाले खतरे से अमेरिका को बचाना है। ट्रम्प कई मौकों पर ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम रक्षा प्रोजेक्ट के लिए अहम बता चुके है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका: तेजी से बढ़ रहा जंगी बेड़ा; ईरानी नेता बोले- खाड़ी के सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस हमारे निशाने पर अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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