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बाढ़ के पानी में बहकर गलती से पाकिस्तान पहुंचे लुधियाना के हरविंदरपाल के साथ जानवरों जैसा सलूक हुआ। उन्हें कैद में रख पाकिस्तानी रेंजर्स ने जमकर पीटा। जासूसी का आरोप कबूल करवाने के लिए पूरी रात नंगे पैर चलवाते। रुकने पर तलवों में डंडे मारते। नींद की झपकी आती तो फिर पिटाई करने लगते। पाक रेंजर्स के टॉर्चर से निकले तो पाकिस्तानी पुलिस ने पकड़ लिया। उन्होंने थाने ले जाकर पीटा। वहां की गंदगी साफ कराई। टॉर्चर की ये कहानी हरविंदरपाल ने बताई। हरविंदरपाल अपने दोस्त रतनपाल के साथ 3 साल पहले बाढ़ में बहन का सामान बचाते वक्त बह गया था। हालांकि कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद हरविंदरपाल की वतन वापसी हुई। जिसमें हरविंदरपाल ने बताया कि किस तरह से जेल में यातनाएं सहने के बाद कानूनी लड़ाई भी उन्हें खुद ही लड़नी पड़ी। हरविंदरपाल ने कहा कि ढाई साल मिले टॉर्चर को वह आज भी याद करके कांप जाते हैं। मगर, अब खुशी है कि अपने परिवार के पास जिंदा वापस पहुंच पाए। हरविंदरपाल पाकिस्तान कैसे पहुंचा, जेल में क्या टॉर्चर हुआ, कैसे छूटकर भारत पहुंचा, इसके बारे में जानने के लिए पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट… पहले जानिए पाकिस्तान कैसे पहुंचे
जुलाई 2023 की भीषण बाढ़ के दौरान सिधवां बेट क्षेत्र के गांव परजियां बिहारीपुर निवासी हरविंदरपाल सिंह और जालंधर के खैहरा मुशतरका निवासी उसका दोस्त रतनपाल सिंह फिरोजपुर के गांव राजोके गट्टी व चांदीवाल में अपनी ममेरी बहन के पास मदद के लिए गए थे। बाढ़ से बहन के घर का सामान व पशुओं को निकाल रहे थे। बाकी लोगों को सुरक्षित निकाला और आखिर में जब भैंसों को निकाल रहे थे तो अचानक पानी का बहाव बढ़ गया और दोनों पानी में बह गए। पाकिस्तान में पकड़े जाने, यातनाओं की पूरी कहानी… अब जानिए, रिहाई कैसे हुई? जासूसी के नाम पर लाहौर जेल में 20 भारतीय
हरविंदर पाल सिंह ने बताया कि सेंट्रल जेल लाहौर की बैरक में करीब 20 से ज्यादा भारतीय कैदी बंद थे, जो कई सालों से पाक जेल में सड़ रहे हैं। उनको भी भारतीय जासूस होने के नाम पर पकड़ा गया है। कई गंभीर बीमार हैं, फिर भी जबरन काम करवाया जाता है। पिता को देख दौड़ा बेटा, पत्नी रोज अरदास करती
1 फरवरी को पत्नी सिकंदर कौर, ससुर जीत सिंह और गांव के सरपंच जसवीर सिंह उसे अपने साथ गांव परजियां बिहारीपुर वापस लेकर पहुंचे। जैसे ही युवक गांव पहुंचा, माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। उसे देखने के लिए गांव उमड़ पड़ा। सबसे मार्मिक पल तब आया जब अपने पिता को सामने देख बेटा दौड़कर उसकी गोद में चढ़ गया। बेटा बोला- “पापा, आप कहां चले गए थे?” ये शब्द सुनते ही सब की आंखें नम हो गईं। पत्नी सिकंदर कौर ने पति को सामने देख कहा- मुझे वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था, मैं रोज गुरुद्वारा साहिब जाकर बस यही अरदास करती थी कि आप वापस लौट आएं। मुझे यकीन था, आप एक दिन जरूर आएंगे।
पाकिस्तानी कैद से छूटे पंजाबी ने बताई टॉर्चर की कहानी:रात भर दौड़ाते, नंगा कर ठंड में बैठाते, रॉड मारते; जासूस बनाने पर तुले रहे
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