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परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि डीएल बनाने वाले 15 प्राइवेटकर्मियों से नियुक्ति के नाम पर करीब 45 लाख रुपये वसूले गए। रकम का बंटवारा विभागीय अफसरों और कंपनी के बीच होने की बात कही जा रही है। विवाद बढ़ने पर पहले प्रोजेक्ट मैनेजर को हटाया गया और फिर उन्हीं के जरिए भर्ती किए गए कर्मचारियों को भी नौकरी से बाहर कर दिया गया। पीड़ितों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। तीन कंपनियों को मिला है डीएल का काम प्रदेश में डीएल बनाने, प्रिंटिंग और डिलीवरी का काम तीन निजी एजेंसियों फोकॉम नेट, सिल्वर टच और रोजमार्टा को सौंपा गया है। इन कंपनियों ने मिलकर लगभग 320 कर्मचारियों की नियुक्ति की। आरोप है कि भर्ती के दौरान कई कर्मियों से मोटी रकम वसूली गई। कानपुर और आगरा जोन में डीएल कार्य देख रही फोकॉम नेट के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन पांडेय पर 15 कर्मचारियों से करीब 45 लाख रुपये लेने का आरोप है। सूत्रों का दावा है कि यह रकम विभागीय अधिकारियों और कंपनी स्तर पर बांटी गई। हालांकि बंटवारे को लेकर विवाद के बाद एसएन पांडेय को हटा दिया गया और उनके द्वारा नियुक्त कर्मियों को भी बाहर कर दिया गया। ऊपर के निर्देश पर हुई वसूली- पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर का दावा पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन पांडेय का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया कंपनी के निर्देश पर हुई और जो भी रकम ली गई, वह सीधे “ऊपर” तक पहुंचाई गई। दूसरी ओर नौकरी से निकाले गए कर्मियों ने वीडियो साक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री से शिकायत की है। मामला फिलहाल फोकॉम नेट से जुड़ा सामने आया है, लेकिन अन्य कंपनियों—रोजमार्टा और सिल्वर टच—में भी पैसे लेकर भर्ती किए जाने की चर्चा है। उपकरण खरीद और एडवांस सैलरी का दबाव सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के बाद उनसे कम्प्यूटर, वेबकैम, बैटरी आदि उपकरण खुद खरीदवाए गए और बिल कंपनी के नाम से बनवाने का दबाव डाला गया। इतना ही नहीं, उनसे सैलरी की रकम भी एडवांस में जमा कराने को कहा गया। जिन कर्मियों ने इस व्यवस्था का विरोध किया, उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। एफआईआर की तैयारी, जांच शुरू नौकरी से निकाले गए कर्मचारी कंपनी और पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि वे न्यायिक कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय जांच की भी मांग करेंगे। 25 जिलों से मांगी गई रिपोर्ट परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि डीएल बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों की नियुक्ति और वसूली के मामले में 25 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएल भर्ती में 45 लाख की वसूली का आरोप:नियुक्ति के नाम पर उगाही, 15 कर्मी बर्खास्त, परिवहन आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
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