निखिल सिद्धार्थ ने स्वयंभू के लिए दो साल की मेहनत:बोले- यह सिर्फ फिल्म नहीं, हमारी जड़ों की कहानी है, हमने इसे बनाया नहीं, जिया है

Actionpunjab
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दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता निखिल सिद्धार्थ अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘स्वयंभू’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘कार्तिकेय 2’ की सफलता के बाद जहां दर्शक उनके अगले प्रोजेक्ट का इंतजार कर रहे थे, वहीं निखिल पिछले दो वर्षों से इस महत्वाकांक्षी फिल्म की तैयारी में जुटे थे। हाल ही में रिलीज हुए टीजर को दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसने फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में निखिल ने अपने लंबे ट्रांसफॉर्मेशन, कठिन प्रशिक्षण, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव पर खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: ‘कार्तिकेय 2’ के बाद हर कोई जानना चाहता था कि आप कहां हैं। दो-ढाई साल आपने एक ही फिल्म को दिए। अब ‘स्वयंभू’ के टीजर को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। इतनी मेहनत और इस सराहना पर आपकी क्या भावना है? जवाब: हमने ‘स्वयंभू’ के लिए लगभग दो वर्षों तक पूरी लगन से काम किया। इसे सिर्फ मेहनत नहीं कहूंगा, हमने इसे जिया है। लंबे बाल रखना, दाढ़ी बढ़ाना और शरीर को योद्धा जैसा बनाना आसान नहीं था। मैं शारीरिक रूप से दुबला हूं, इसलिए मांसपेशियां बढ़ाने के लिए विशेष आहार और कठिन अभ्यास करना पड़ा। हर एक्शन दृश्य से पहले तैयारी करनी होती थी। यह चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन अनुभव बेहद सुंदर रहा। अब जब टीजर को लोगों का प्यार मिल रहा है, तो लगता है कि इंतजार सार्थक होगा। सवाल: फिल्म की तकनीकी टीम बेहद मजबूत है। क्या इससे अपेक्षाएं बढ़ गईं? जवाब: निश्चित रूप से। हमारे छायांकन निर्देशक के. के. सेंथिल कुमार ने ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी भव्य फिल्मों में काम किया है। संगीत रवि बसरूर का है जिन्होंने ‘केजीएफ’, ‘सालार’ और ‘मार्को’ जैसी फिल्मों का संगीत दिया है। जब ऐसे अनुभवी लोग किसी परियोजना से जुड़ते हैं, तो जिम्मेदारी स्वतः बढ़ जाती है। यह भरोसा केवल कलाकार पर नहीं, बल्कि कहानी की ताकत पर भी आधारित होता है। सवाल: टीजर में ‘सेंगोल’ दिखाया गया है। बहुत लोग इसके बारे में नहीं जानते। फिल्म की कहानी क्या है? जवाब: फिल्म की शुरुआत ‘सेंगोल’ से होती है, जो राजदंड और धर्म का प्रतीक माना जाता है। कथा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी वर्ष 985 ईस्वी के एक सैनिक ‘कृष्णन रामन’ के इर्द-गिर्द घूमती है। वह कोई राजा नहीं, बल्कि एक साधारण सैनिक है, लेकिन परिस्थितियां उसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा बना देती हैं। यह कहानी दिखाती है कि एक सामान्य व्यक्ति भी असाधारण योगदान दे सकता है। सवाल: आपकी फिल्मों में भारतीय संस्कृति और इतिहास की झलक साफ दिखाई देती है। क्या यह आपकी सोच का हिस्सा है? जवाब: हां, बिल्कुल। बचपन में दादा-दादी से रामायण और महाभारत की कहानियां सुनता था। वे कहानियां मन में बस गईं। मेरा मानना है कि अपनी संस्कृति और इतिहास को सही और सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत करना जरूरी है। आज की पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जुड़ना चाहिए। मनोरंजन के साथ अगर प्रेरणा मिले, तो वह और भी बेहतर है। सवाल: फिल्म के लिए आपने किस तरह की तैयारी की? जवाब: निर्माता ने मेरे किरदार पर विशेष ध्यान दिया। मुझे 45 दिनों के लिए वियतनाम भेजा गया, जहां 30-40 फाइटर्स के साथ प्रशिक्षण लिया। तीरंदाजी, हथियारों का अभ्यास और घुड़सवारी सीखी। मेरे घोड़े का नाम ‘डायमंड’ था, जिससे आज भी भावनात्मक जुड़ाव है। डाइट में बड़ा बदलाव किया। शुगर पूरी तरह बंद की। प्रोटीन, अंडे और मांसाहार शामिल किया। आज के दर्शक वास्तविकता चाहते हैं, इसलिए स्क्रीन पर कुछ भी बनावटी नहीं होना चाहिए। सवाल: फिल्म में प्रेम कहानी और तकनीक को लेकर क्या खास है? जवाब:फिल्म में प्रेम कहानी भी है, जो बहुत संतुलित और भावनात्मक है। संयुक्ता मेनन और नभा नटेशन के साथ मेरी अच्छी तालमेल दिखेगी। सवाल: दर्शकों को ‘स्वयंभू’ से क्या उम्मीद रखनी चाहिए? जवाब: यह लगभग तीन घंटे की भव्य सिनेमाई यात्रा है। मेरी पहली 3डी फिल्म है और आधुनिक तकनीक में बनी है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, हर दर्शक इसे अपनेपन से देख सकेगा। अगर दर्शकों का प्यार मिला, तो आगे इसका विस्तार भी संभव है। फिलहाल यह एक इतिहास, रोमांच और प्रेरणा से भरपूर,संपूर्ण कहानी है।

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