Falgun Amawasya significance in hindi, Surya grahan on 17th February, solar eclipse 2026, rituals about Falgun Amawasya

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23 घंटे पहले

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आज (मंगलवार, 17 फरवरी) फाल्गुन अमावस्या है। इसके साथ ही सूर्य ग्रहण भी हो रहा है, लेकिन ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए हमारे यहां सूतक नहीं है। पूरे दिन फाल्गुन अमावस्या से जुड़े शुभ काम किए जा सकते हैं।

सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में, हिंद, अटलांटिक और पेसिफिक के कुछ क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर में लगभग 3.26 बजे शुरू होगा। ग्रहण की समाप्ति शाम को लगभग 7.57 बजे होगा।

राहु-केतु से जुड़ी है समुद्र मंथन की कथा

सूर्य ग्रहण की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। प्राचीन काल में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन में 14 रत्न निकले थे। समुद्र मंथन में जब अमृत निकला तो इसके लिए देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और देवताओं को अमृतपान करवाने लगे। उस समय राहु नाम के असुर ने भी देवताओं का वेश धारण करके अमृत पान कर लिया। चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को इसकी जानकारी दे दी। विष्णुजी ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया, क्योंकि राहु ने भी अमृत पी लिया था, इस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। तभी से राहु चंद्र और सूर्य को अपना शत्रु मानता है। समय-समय पर इन ग्रहों को ग्रसता है। शास्त्रों में इसी घटना को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

ग्रहण से जुड़ी मान्यताएं

मान्यता है कि ग्रहण के समय जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुंचता है, तब तीन लोकों स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल पर प्रभाव पड़ता है। ग्रंथों में इस समय को अशुभ माना गया है। इसलिए सूर्य ग्रहण के समय विवाह, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ भी नहीं की जाती है। ग्रहण के समय में मानसिक रूप से मंत्र जप किए जाते हैं और जरूरतमंद लोगों को दान-पुण्य किया जाता है।

सूतक काल वह समय है जो सूर्य ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण खत्म होने के साथ खत्म होता है। चूंकि 17 फरवरी का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

सूर्य पूजा से करें दिन की शुरुआत

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, आज फाल्गुन अमावस्या है, इस तिथि पर सूर्य पूजा करने का विशेष महत्व है। सुबह स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे में जल लें, जल में कुमकुम, चावल, फूल डालें और फिर ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए उगते सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।

इस सूर्य ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा, इसलिए पूरे दिन फाल्गुन पूर्णिमा से जुड़े धर्म-कर्म किए जा सकेंगे। इस दिन नदी स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ, पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण कर सकते हैं। दोपहर में गाय के गोबर से बना कंडा जलाएं, जब कंडे से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी अर्पित करें। ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: मंत्र का जप करें। हथेली में जल लें और अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें।

घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।

शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा, गुलाब चढ़ाएं। भगवान को चंदन का लेप लगाएं। धूप-दीप जलाएं। मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

शाम को सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। अमावस्या पर तुलसी पूजा करने का विशेष महत्व है। तुलसी के मंत्र महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।। का जप करें। पूजा में तुलसी को लाल चुनरी चढ़ानी चाहिए।

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