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दौसा जिले के पावटा गांव में होली दूज पर खेली जाने वाली डोलची ‘खूनी’ होली की शुरुआत हो चुकी है। करीब 500 वर्षों से यह होली बल्लू शहीद की वीरता की स्मृति में मनाई जा रही है। इसकी विशेषता यह है कि दो धड़ों में बंटे युवक नंगे बदन चमड़े की डोलची में पानी भरकर एक-दूसरे पर प्रहार करते हैं, जिससे पूरा मैदान रणभूमि जैसा लगता है। हवन से शुरुआत, रणभूमि जैसा माहौल महवा उपखंड से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित पावटा गांव के हदीरा मैदान में सुबह हवन के साथ आयोजन की शुरुआत होती है। इसके बाद भैरुजी मंदिर पर होली का आमंत्रण दिया जाता है। परंपरा के अनुसार दणगस और पीलवाड़ गोत्र के युवक दो दलों में आमने-सामने होते हैं। अतिथियों के संकेत मिलते ही दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पानी से भरी डोलची से प्रहार शुरू कर देते हैं। नंगे बदन युवाओं की पीठ पर पानी की तेज बौछार पड़ते ही लाल निशान उभर आते हैं, लेकिन जोश कम नहीं होता। जवाबी वार उतनी ही तीव्रता से किया जाता है। यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो दो सेनाएं आमने-सामने युद्ध कर रही हों। इसी कारण इसे ‘खूनी होली’ कहा जाता है।
दौसा में शुरू हुई खूनी होली:शहीद बल्लू की याद में नंगे बदन खेलने की परंपरा, युद्ध भूमि जैसा लगाता है मैदान
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