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कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का कनेक्शन सिर्फ यूपी ही नहीं, विदेश से भी जुड़ रहा है। विदेशों के मरीज भी यहां चोरी-छिपे किडनी ट्रांसप्लांट कराने आते थे। तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल करने के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। डोनर और रिसीवर दोनों से डील फाइनल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग ठिकानों पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। किस हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट होगा, किस डॉक्टर की टीम करेगी, डोनर-रिसीवर कौन हैं…? यह सब सीक्रेट होता था। हर काम की जिम्मेदारी के लिए अलग-अलग व्यक्ति था। डॉक्टरों की टीम फ्लाइट से पहुंचती और चंद घंटे में किडनी ट्रांसप्लांट कर लौट जाती थी। इस मामले में 8 गिरफ्तारी हो चुकी है। किडनी ट्रांसप्लांट स्कैंडल कैसे काम कर रहा था। इसका इंटरनेशन कनेक्शन क्या है…? पकड़े गए ओटी टेक्नीशियन ने दैनिक भास्कर से क्या कुछ बताया। पढ़िए रिपोर्ट… ओटी टेक्निशयन ने उगले राज- कई राज्यों में किए ट्रांसप्लांट
कानपुर के डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि 6 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। गुरुवार 2 अप्रैल को दो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को अरेस्ट किया गया है। राजेश गाजियाबाद का रहने वाला है। वह सर्वोदय हॉस्पिटल नोएडा में ओटी टेक्नीशियन है। जबकि कुलदीप सिंह राघव हापुड़ के पिलखुआ का रहने वाला है। शांति गोपाल हॉस्पिटल में ओटी टेक्नीशियन है। पूछताछ में दोनों ने बताया- नोएडा का डॉ. रोहित ही दोनों को किडनी ट्रांसप्लांट के केस में भेजता था। उनके साथ एक यूरोलॉजिस्ट भी किडनी ट्रांसप्लांट करने दिल्ली से कानपुर फ्लाइट से आता था। हर केस में उन्हें 35 से 50 हजार रुपए तक दिए जाते थे। साउथ अफ्रीका की महिला का किया ट्रांसप्लांट
डीसीपी कासिम आबिदी के मुताबिक, टेक्नीशियन ने खुलासा किया है कि कानपुर के केस ही नहीं, साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका के ट्रांसप्लांट में भी दोनों शामिल हुए थे। गैंग कानपुर के साथ ही दिल्ली, मेरठ, नोएडा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट करता है। नोएडा के डॉक्टर रोहित ने हर राज्य में अपने हॉस्पिटल का पैनल बना रखा है। जैसे कानपुर में उसके पैनल में छह हॉस्पिटल हैं। कानपुर और आसपास के जिलों का पूरा काम शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा ही देखता था। 8 डॉक्टरों का पैनल, फ्लाइट का इंतजाम
आठ डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। जहां भी ट्रांसप्लांट करने जाना होता था, डॉ. रोहित सभी का फ्लाइट से आने-जाने का इंतजाम करता था। कानपुर में भी इसी तरह से 29 मार्च की रात 9 बजे मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को आयुष की किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। डॉक्टर फ्लाइट से सीधे संबंधित शहर पहुंचते, किडनी ट्रांसप्लांट कर वहां से रवाना हो जाते। डोनर-रिसीवर का नाम सीक्रेट रखते
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि पूरा मिशन सीक्रेट की तरह चलाया जा रहा था। किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टरों की टीम, डोनर- रिसीवर और किस हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट होना है…ये सब सीक्रेट रखा जाता। यह पूरा काम अलग-अलग टीम करती है। जैसे मुजफ्फरनगर के नॉर्थ सिविल लाइंस में रहने वाली पारुल तोमर की मेरठ के डॉ. अफजल से डील हुई थी। देहरादून में पढ़ाई करने वाले बिहार के एमबीए छात्र आयुष कुमार को किडनी बेचने के लिए कानपुर के शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा से डील तय की थी। ये दोनों लोग नोएडा के फरार चल रहे डॉ. रोहित के संपर्क में थे। विदेशियों की 2.50 करोड़ तक में बदली किडनी
पुलिस की माने तो गैंग इंडिया में तो 60 लाख से लेकर 1 करोड़ तक में किडनी ट्रांसप्लांट करता था। लेकिन विदेशियों से ढाई करोड़ तक वसूले जाते थे। साउथ अफ्रीका की अरेबिका की किडनी 2 से 2.50 करोड़ में बदलने के सबूत मिले हैं। सिंडीकेट ने एक-दो नहीं सैकड़ों किडनी ट्रांसप्लांट किए हैं। इस सिंडीकेट में 50 से ज्यादा दलाल, डॉक्टर समेत अन्य के शामिल होने की बात सामने आ रही है। पुलिस की 8 टीमें कानपुर से लेकर मेरठ, लखनऊ, दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में छापेमारी कर रही है। पुलिस कार्रवाई के बारे में जानिए
कानपुर पुलिस इस केस में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। डीसीपी वेस्ट ने बताया कि खुलासा होने के बाद 29 मार्च की रात आहूजा अस्पताल आने-जाने वालों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। डॉक्टरों को लाने-ले जाने वाली दो कार थीं। एक कार में 5 डॉक्टर और दूसरी में 3 डॉक्टर जाते दिखे हैं। तीन डॉक्टरों को गाजियाबाद जबकि पांच डॉक्टरों को लखनऊ में ड्राप किया गया। पुलिस आगे के सीसीटीवी भी खंगाल रही है। अब तक की जांच में सामने आया है कि इस गैंग में नोएडा का डॉ. रोहित उर्फ राहुल और मेरठ के तीन डॉक्टर डॉ. अफजल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ अमित शामिल हैं। इन सभी के नाम एफआईआर में भी हैं। इन सभी डॉक्टरों की अरेस्टिंग के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। जिस मेरठ के अस्पताल से जुड़ रहे तार, उसके बारे में जानिए कानपुर किडनी कांड की जांच में सामने आया है कि मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल में 100 से अधिक ट्रांसप्लांट कराए गए हैं। मंगल पांडे नगर में ये अस्पताल करीब 350 गज में बना है। बिल्डिंग चार मंजिला है। अस्पताल के डायरेक्टर अमित कुमार हैं। अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ का दावा है कि डॉ. अफजाल नाम का कोई डॉक्टर यहां से जुड़ा नहीं है। मैनेजर के अनुसार, अस्पताल में केवल नियमित ओपीडी डॉ. वैभव मुग्दल की चलती हैं, जबकि अन्य डॉक्टर जरूरत के अनुसार ऑन-कॉल बुलाए जाते थे। फिलहाल पुलिस मैनेजर से पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है। पहले भी चर्चा में आया था अल्फा हॉस्पिटल
वहीं, मेरठ के CMO डॉ. अशोक कटारिया का कहना है कि 26 नवंबर 2025 को एक मरीज ने शिकायत की थी कि दलाली लेकर भर्ती किया गया। इस पर अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड किया गया। पुलिस जांच में आरोप की पुष्टि नहीं हुई। इस पर 21 जनवरी 2026 को लाइसेंस बहाल कर दिया गया। ——————– ये खबर भी पढ़ें… किडनी बेचने वाला MBA स्टूडेंट गर्लफ्रेंड के सामने फूट-फूटकर रोया:कानपुर में पुलिसवालों के पैर पकड़े; बोला- मां को मत बताना कानपुर में रुपए के लालच में अपनी किडनी बेचने वाले आयुष को हैलट अस्पताल से लखनऊ रेफर किया गया है। साथ ही किडनी रिसीवर पारुल तोमर को भी लखनऊ लाया गया है। दोनों को लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे पहले हैलट में पुलिस ने आयुष से कहा कि वह अपने घरवालों को पूरी बात बता दे। इस पर आयुष पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर रोने लगा। पढ़ें पूरी खबर
किस हॉस्पिटल में किसका ट्रांसप्लांट, सब सीक्रेट होता था:ढाई करोड़ में अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन; कानपुर किडनी कांड का इंटरनेशनल कनेक्शन
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