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सलूंबर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से ओजस्वी उपवन में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक प्रबुद्ध जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद राष्ट्रगीत का गायन किया गया, जिसने पूरे वातावरण में देशभक्ति का संचार किया। 7 कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की गोष्ठी की भूमिका प्रस्तुत करते हुए जितेंद्र मेहता ने संघ के शताब्दी वर्ष के तहत सात प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की। इन आयोजनों में विजयदशमी उत्सव, शाखा मिलन, वृहद गृह संपर्क अभियान, सद्भावना बैठक, हिंदू सम्मेलन, प्रमुख जन गोष्ठी, युवा सम्मेलन और पूर्ण शाखा युक्त मंडल-मिलन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में समरसता बढ़ाना और राष्ट्र के प्रति दायित्व बोध जागृत करना है। संघ की कार्यपद्धति के बारे में बताया मुख्य वक्ता प्रांत संयोजक (धर्म जागरण) महिपाल सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में संघ की वर्तमान कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राठौड़ ने सामाजिक एकता, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और एक संगठित समाज की आवश्यकता पर बल दिया। नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किए गोष्ठी के दौरान एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें जनसंख्या संतुलन, प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, कुटुंब प्रबोधन, आत्मरक्षा, संस्कृति जागरण और धर्मांतरण जैसे समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। उपस्थित नागरिकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और शंका समाधान सत्र में उनके प्रश्नों के उत्तर दिए गए। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
सलूंबर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम:प्रबुद्ध जन गोष्ठी में गूंजा राष्ट्र निर्माण का स्वर, संस्कृति पर हुआ मंथन
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