पोंटी चड्‌ढा मर्डर केस में आरोपी नामधारी को राहत:मोहाली कोर्ट से फर्जी पते पर आर्म्स लाइसेंस केस में बरी, बेटा है भगोड़ा घोषित

Actionpunjab
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उत्तर प्रदेश के शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा हत्याकांड में मुख्य आरोपी के रूप में नामजद किए सुखदेव सिंह नामधारी समेत सात आरोपियों को मोहाली की जिला अदालत ने फर्जी पत्ते पर हथियार लाइसेंस बनाने के एक मामले में सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया है। यह मामला फर्जी राशन कार्ड, पासपोर्ट और हथियार लाइसेंस बनाने से जुड़ा था। वर्ष 2012 में दर्ज इस केस में जांच टीम यह साबित करने में असफल रही कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर पासपोर्ट और हथियार लाइसेंस हासिल किए थे। बचाव पक्ष के वकील एचएस धनोआ और रेनुका रंधावा ने अदालत में दलील दी कि सुखदेव सिंह नामधारी और उनके रिश्तेदारों ने किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज तैयार नहीं किए और न ही गलत तरीके से पासपोर्ट या हथियार लाइसेंस बनवाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुखदेव सिंह नामधारी, लखविंदर सिंह, बलदेव सिंह, गुरसेवक सिंह, शेर सिंह, कुलविंदर सिंह और तत्कालीन कुराली थाने में तैनात एएसआई गुरचरण सिंह को बरी करने के आदेश दिए। बेटा भगोड़ा घोषित करार इस मामले में एक आरोपी सुखदेव सिंह (पुत्र दलीप सिंह) को भगोड़ा घोषित किया गया है, जबकि आरोपी सतपाल की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई थी। गौरतलब है कि उस समय पंजाब सरकार के गृह विभाग के प्रमुख सचिव डीएस. बैंस की जांच रिपोर्ट के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री ने नामधारी और उसके हथियार लाइसेंस की पुलिस वेरिफिकेशन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। ऐसे दर्ज हुआ था केस प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि सुखदेव सिंह नामधारी और उनके भाई बलदेव सिंह ने कुराली पते पर हथियार लाइसेंस बनवाया था, जिसकी पुष्टि वार्ड नंबर-11 निवासी सतपाल सिंह ने की थी। उसने अपने बयान में कहा था कि वह दोनों को लंबे समय से जानता है और वे मास्टर कॉलोनी में रहते हैं। इसके अलावा, उस समय कुराली पुलिस चौकी के इंचार्ज और थाने के मुंशी द्वारा भी पुलिस वेरिफिकेशन में संतोषजनक रिपोर्ट दी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर 21 दिसंबर 2012 को स्टेट क्राइम पुलिस थाना फेज-4, मोहाली में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं (196, 197, 198, 199, 200, 420, 465, 468, 471, 120बी) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब इस केस में पंजाब कनेक्शन जानिए पंजाब के एड्रेस पर हथियार पोंटी चड्ढा और उनके भाई हरदीप चड्ढा की हत्या 17 नवंबर 2012 को दक्षिण दिल्ली के छतरपुर स्थित उनके पारिवारिक फार्महाउस में हुई थी। हत्या के तुरंत बाद हुई शुरुआती जाच में ही पंजाब से जुड़े तार सामने आने लगे थे। 29 नवंबर 2012 को पंजाब सरकार ने मुख्य आरोपी सुखदेव सिंह नामधारी के हथियार लाइसेंसों की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 10 दिसंबर 2012 को सरकार को सौंपी गई एक प्रोब रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि नामधारी ने मोहाली और अमृतसर में फर्जी पतों का उपयोग करके हथियार लाइसेंस और पासपोर्ट प्राप्त किए थे। जांच में पाया गया कि नामधारी मूल रूप से उत्तराखंड का रहने वाला था, लेकिन उसने पंजाब के मोहाली (एसएएस नगर) के कुराली इलाके का फर्जी पता इस्तेमाल किया। उसने खुद को “मास्टर कॉलोनी, कुराली” का निवासी दिखाकर हथियार लाइसेंस और पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। जांच आगे बढ़ी तो मोहाली में केस इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई आई। उस मीडिया रिपोर्ट में आया कि पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल महेंद्र सिंह ने बिना किसी भौतिक जांच के नामधारी के पक्ष में रिपोर्ट दे दी। मोहाली और रोपड़ के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों ने बिना दोबारा जांच किए लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया। फर्जी लाइसेंस के आधार पर नामधारी ने कई हथियार खरीदे, जिनमें .315 बोर राइफल (जिसका उपयोग पोंटी चड्ढा हत्याकांड में होने का संदेह जताया गया) डबल बैरल (DBBL) गन शामिल थी। तत्कालीन गृह सचिव डी.एस. बैंस की जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। नामधारी ने अमृतसर और मोहाली से डुप्लीकेट लाइसेंस बुकलेट भी बनवाई। इसके बाद मोहाली प्रशासन ने नामधारी समेत 37 लोगों के हथियार लाइसेंस रद्द किए। जुलाई 2022 में पंजाब पुलिस ने नामधारी और हेड कांस्टेबल महेंद्र सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मोहाली अदालत में चार्जशीट दाखिल की

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