सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा:इससे हिंदू धर्म को नुकसान; केंद्र ने कहा- धार्मिक मामलों में अदालतों का दखल ठीक नहीं

Actionpunjab
2 Min Read




सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सबरीमाला केस की सुनवाई के दौरान मंदिरों के रीति-रिवाजों का जिक्र हुआ। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मंदिरों में सिर्फ खास समुदाय की एंट्री और बाहरी लोगों की मनाही से समाज बंटेगा। यह हिंदु धर्म के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मान लीजिए (सबरीमाला केस को छोड़कर), अगर यह कहा जाए कि सिर्फ गौड़ सारस्वत लोग ही एक मंदिर में आएं या कांची मठ के लोग सिर्फ कांची ही जाएं, दूसरे मठ (जैसे शृंगेरी) न जाएं तो यह ठीक नहीं होगा। बल्कि जितने ज्यादा लोग अलग-अलग मंदिरों और मठों में जाएंगे, उतना ही धर्म मजबूत बनेगा। उधर केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट वैद्यनाथन ने कहा कि इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं, जब धर्म से जुड़े विवाद संवेदनशील होते हैं। वहां अदालतें हस्तक्षेप नहीं करतीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने गुरुवार को धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों में लगातार तीसरे दिन सुनवाई की। इसमें विभिन्न धर्मों में प्रचलित धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा और दायरे पर भी विचार किया जा रहा है। तीसरे दिन की सुनवाई के 7 पॉइंट्स… सुप्रीम कोर्ट के 3 तर्क
केंद्र सरकार के 4 तर्क सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच 7 से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। रिव्यू पिटीशनर और उनके समर्थक 7 से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोधी 14 से 16 अप्रैल तक दलीलें देंगे। ये खबरें भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की पल-पल की जानकारी के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं…

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *