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रायबरेली में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना के तहत प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा है। राष्ट्र गौरक्षक सेना, उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में जिलाधिकारी हर्षिता माथुर को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, जिले में आरटीई के तहत कुल 6405 सीटें निर्धारित की गई थीं, जिसके लिए 865 विद्यालयों को चिन्हित किया गया था। इन सीटों के लिए 9229 बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किया, जिनमें से 448 आवेदन निरस्त कर दिए गए। वर्तमान में भी 1584 सीटें रिक्त बताई जा रही हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। राष्ट्र गौरक्षक सेना का आरोप है कि विभाग द्वारा पोर्टल पर स्कूलों की मैपिंग सही तरीके से नहीं की गई, जिसके कारण बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त हुए। इसके अतिरिक्त, शासनादेश का उचित पालन नहीं किया गया और योजना का समुचित प्रचार-प्रसार न होने के कारण भी कई पात्र बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए। पोर्टल में गलत पता दर्ज करने का भी आरोप ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश का प्रावधान होने के बावजूद कई स्कूल सही जानकारी नहीं दे रहे हैं और कम संख्या में बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं। बालिका विद्या मंदिर, सेमरी कोठी और स्वामी जानकी शरण पब्लिक स्कूल जैसे कुछ विद्यालयों पर पोर्टल में गलत पता दर्ज करने का भी आरोप है, जिससे वार्ड निर्धारण में गड़बड़ी हुई। संगठन ने 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चल रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ के बीच इस प्रकार की लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं, जिससे योजना के मूल उद्देश्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। राष्ट्र गौरक्षक सेना ने मांग की है कि जिन बच्चों के फॉर्म निरस्त किए गए हैं, उन पर पुनर्विचार किया जाए और रिक्त सीटों पर शीघ्र प्रवेश दिलाया जाए, ताकि किसी भी बच्चे का भविष्य प्रभावित न हो।
आरटीई प्रवेश में गड़बड़ी, सैकड़ों आवेदन निरस्त:रायबरेली में हजारों सीटें खाली, उच्चस्तरीय जांच की मांग
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