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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम की मुरादाबादी के गांव मंगूपुरा में जमीन अधिग्रहण की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही बहुत पहले ही पूरी हो चुकी है और अब लंबी अवधि बाद हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। नया मुरादाबाद योजना मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा ‘नया मुरादाबाद’ योजना के तहत आवासीय और व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए 175.44 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था।मदरसे ने तर्क दिया था कि उनकी भूमि पर 1979-80 से शैक्षणिक संस्थान चल रहा है और अधिग्रहण की कार्यवाही नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) के तहत रद्द हो जानी चाहिए क्योंकि उन्हें मुआवजा नहीं मिला और भौतिक कब्जा भी नहीं लिया गया। चार याचिकाएं पहले ही थीं अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने इस अधिग्रहण को चुनौती देने के लिए पहले भी चार बार याचिकाएं दायर की थीं, जो अलग-अलग समय पर निस्तारित या खारिज कर दीइ गई थीं। प्राधिकरण की दलील थी कि भूमि का कब्जा 7 नवंबर 2000 को ही लिया जा चुका था और निर्धारित मुआवजे की राशि भी सरकारी खजाने में जमा करा दी गई थी। यह भी बताया गया कि अधिगृहीत भूमि पर पहले ही एक आवासीय कॉलोनी विकसित की जा चुकी है और कई लोगों को भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। ‘इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी का हवाला हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहर लाल’ मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 2013 के अधिनियम की धारा 24(2) का उपयोग उन मामलों को पुनर्जीवित करने के लिए नहीं किया जा सकता जो पहले ही समाप्त हो चुके हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार जब भूमि का कब्जा लेकर वह राज्य में निहित हो जाती है, तो उसे अधिग्रहण से मुक्त नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता द्वारा बार-बार याचिकाएं दायर करने को अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और याचिका खारिज कर दिया।
मदरसे की जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज:मदरसा जामिया अरबिया हयातुल उलूम मुरादाबादी का मामला
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