वैशाख महीने के आखिरी 2 दिन खास::30 अप्रैल को चतुर्दशी पर नरसिंह पूजा, 1 मई को वैशाख पूर्णिमा और बुद्ध जयंती

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30 अप्रैल और 1 मई को वैशाख महीने के आखिरी दो दिन रहेंगे। ये दिन भगवान विष्णु के अवतारों की पूजा के लिए खास माने जाते हैं। इन दिनों में वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को भगवान नरसिंह का प्राकट्य दिवस होता है। इसके बाद वैशाख पूर्णिमा पर भगवान के कूर्म अवतार की पूजा और बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार इस पूर्णिमा पर भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार यानी कछुए के रूप में अवतार लिया था। स्कंद पुराण के वैशाख माहात्म्य में इस महीने को भगवान विष्णु का प्रिय महीना बताया गया है। इस महीने में स्नान, दान, जप, व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना गया है। नरसिंह जयंती की चतुर्दशी तिथि 30 अप्रैल को रहेगी और वैशाख पूर्णिमा 1 मई को है। 30 अप्रैल को चतुर्दशी पर भगवान नरसिंह की पूजा
वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है। श्रीमद्भागवत महापुराण के सातवें स्कंध में भगवान नरसिंह के प्राकट्य का जिक्र आता है। कथा के अनुसार हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकशिपु उसे बार-बार मारने की कोशिश करता था। जब उसने प्रह्लाद से पूछा कि क्या उसका भगवान खंभे में भी है, तब भगवान विष्णु नरसिंह रूप में खंभे से प्रकट हुए। उनका रूप आधा सिंह और आधा मनुष्य का था। भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और हिरण्यकशिपु के अहंकार का अंत किया। नरसिंह जयंती पर शाम की पूजा खास मानी जाती है। इस दिन भगवान नरसिंह के चित्र या प्रतिमा के सामने दीप जलाएं। पीले फूल, चंदन, तुलसी और नैवेद्य अर्पित करें। “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्” मंत्र का जप कर सकते हैं। बच्चों की रक्षा, भय से मुक्ति, साहस और अन्याय पर विजय की कामना से इस दिन भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है। व्रत न कर सकें तो क्या करें
जो लोग व्रत नहीं कर सकते, वे शाम को भगवान नरसिंह को प्रणाम करें। घर के मंदिर में दीप जलाएं। बच्चों, विद्यार्थियों या जरूरतमंदों को फल, भोजन, पुस्तक या वस्त्र दान कर सकते हैं। इस दिन क्रोध, अहंकार और अन्याय से बचने का संकल्प लेना भी पूजा का हिस्सा माना जा सकता है। वैशाख पूर्णिमा पर स्नान-दान का महत्व
वैशाख पूर्णिमा इस महीने का आखिरी दिन है। पूर्णिमा तिथि स्नान, दान, सत्यनारायण पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य के लिए शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल रात 9:12 बजे शुरू होकर 1 मई रात 10:52 बजे तक रहेगी। इसलिए वैशाख पूर्णिमा 1 मई को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय से पहले या सुबह स्नान किया जाएगा। भगवान विष्णु की पूजा, घर में सत्यनारायण कथा करवा सकते हैं। जल, अन्न, फल, वस्त्र, छाता, पंखा या जरूरत का सामान दान करें। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। पूर्णिमा पर कूर्म जयंती: समुद्र मंथन से जुड़ा अवतार
वैशाख पूर्णिमा को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा की जाती है। श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कंध में समुद्र मंथन का वर्णन है। कथा के अनुसार देवता और असुर अमृत पाने के लिए मंदार पर्वत से समुद्र मंथन कर रहे थे। पर्वत को आधार नहीं मिला और वह समुद्र में डूबने लगा। तब भगवान विष्णु ने कूर्म यानी कछुए का रूप धारण किया और मंदार पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला। इसके बाद समुद्र मंथन आगे बढ़ा। कूर्म जयंती पर क्या करें
इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म रूप का स्मरण करें। विष्णु भगवान को पीले फूल, तुलसी, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। घर में विष्णु सहस्रनाम, गीता या श्रीमद्भागवत का पाठ कर सकते हैं। जरूरतमंदों को जल, अन्न, फल, वस्त्र, छाता या पंखा दान करना शुभ माना जाता है। इसी दिन बुद्ध पूर्णिमा भी
वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी मनाई जाती है। बौद्ध परंपरा में यह दिन भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ा माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा को भगवान बुद्ध के जीवन की इन तीन प्रमुख घटनाओं से जुड़ा पर्व बताया गया है। बुद्ध ने अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। बुद्ध पूर्णिमा पर बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी और देश के कई बौद्ध तीर्थों में विशेष पूजा, ध्यान, प्रार्थना और धर्मसभा होती है। ऐसा माना जाता है कि बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई। सारनाथ में उन्होंने पहला उपदेश दिया और कुशीनगर महापरिनिर्वाण से जुड़ा तीर्थ है। बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करें
इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और भगवान बुद्ध को प्रणाम करें। शांति, अहिंसा, दया और संयम का संकल्प लें। जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े फल या पानी दान करें। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और घर के मंदिर में दीप जलाएं।

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