करनाल में मेयर का फर्जी पीए गिरफ्तार:मेयर के नाम पर करता था धोखाधड़ी,हरिद्वार में कमरे बुक करवाने तक पहुंचा मामला, पहले भी चेतावनी के बावजूद नहीं माना आरोपी

Actionpunjab
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हरियाणा के करनाल शहर में मेयर के नाम पर ठगी करने वाले एक शख्स को सिविल लाइन थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को मेयर का पीए बताकर लोगों से पैसे ऐंठता था और झांसा देकर काम करवाने के नाम पर धोखाधड़ी करता था। पुलिस ने उसे कर्ण विहार इलाके से काबू किया है और अब कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। मेयर की शिकायत पर हुई कार्रवाई
मेयर रेणुबाला गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि कर्ण विहार गली नंबर-5 निवासी ओम प्रकाश उर्फ प्रदीप लंबे समय से खुद को उनका पीए बताकर लोगों को ठग रहा है। वह फोन पर और आमने-सामने लोगों से संपर्क करता था और काम करवाने का झांसा देकर पैसे लेता था।मेयर ने बताया कि आरोपी पहले भी इस तरह की हरकतों में पकड़ा जा चुका है, लेकिन उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। इसके बावजूद उसने अपनी गतिविधियां जारी रखीं। हरिद्वार में भी किया फर्जीवाड़ा
शिकायत के अनुसार, कुछ दिन पहले आरोपी ने हरिद्वार में भी खुद को मेयर का पीए बताकर लोगों को गुमराह किया और कमरे बुक करवाए। इस घटना के बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस ने कर्ण विहार से किया काबू
जांच अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि 1 मई की शाम आरोपी को कर्ण विहार से गिरफ्तार किया गया। आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(2) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आज इसका सरकारी अस्पताल में मेडिकल करवाया है और शनिवार को उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि गहन पूछताछ की जा सके। कितने लोगों से ठगी की, होगी जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कब से फर्जी पीए बनकर काम कर रहा था और अब तक कितने लोगों से ठगी कर चुका है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल तो नहीं है। कौन हैं करनाल की मेयर
रेणुबाला गुप्ता करनाल नगर निगम की मेयर हैं और भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई हैं। वे करनाल शहर की निवासी हैं और लंबे समय से सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। बीते नगर निगम चुनाव में उन्होंने मेयर पद पर जीत हासिल की। पहले चेतावनी, अब सख्त कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि पहले चेतावनी देने के बावजूद आरोपी के नहीं सुधरने पर अब सख्त कार्रवाई की जा रही है। रिमांड के दौरान उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी, ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

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