बहन IAS और भाई ने PCS बन बेरोजगारों को लूटा:सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे रुपए, जी रहे थे लग्जरी लाइफ

Actionpunjab
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बरेली की ग्रेटर ग्रीन पार्क जैसी पॉश कॉलोनी, जहां शहर के नामी डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस-आईपीएस अधिकारी रहते हैं, वहां विप्रा ने खुद को ‘सुपर क्लास’ दिखाने के लिए ठगी के पैसों का ऐसा जाल बुना कि असली रसूखदार भी धोखा खा गए। पुलिस जब इन्वेस्टिगेशन के लिए कोठी के अंदर पहुंची, तो वहां का रॉयल ठाठ देखकर अधिकारी हैरान थे। पुलिस की केस डायरी के मुताबिक, घर के कोने-कोने को इस तरह डिजाइन किया गया था कि किसी को शक न हो। यह सब इसलिए किया गया ताकि कॉलोनी के दूसरे बड़े अधिकारियों के बीच विप्रा खुद को उनसे भी बड़ा पावरफुल दिखा सके। पड़ोसियों की आंखों में धूल और आलीशान चमक का असर इस हाई-फाई कालोनी के लोग बताते हैं कि वहां डर जैसा कुछ नहीं था, लेकिन विप्रा की कोठी की लक्जरी चर्चा का विषय जरूर थी। पुलिस की पूछताछ में एक पड़ोसी ने बताया कि हमें लगता था कि शायद शासन में इनकी बहुत ऊंची पहुंच है, क्योंकि इनकी लाइफस्टाइल किसी बड़े मिनिस्टर से कम नहीं थी। पुलिस ने पाया कि विप्रा ने जानबूझकर अपनी गाड़ियों पर उत्तर प्रदेश सरकार और एडीएम के बोर्ड इस तरह लगवाए थे कि निकलते-बैठते वक्त पूरी कॉलोनी की नजर उन पर पड़े। यह खुद को उस हाई-प्रोफाइल सर्कल का हिस्सा दिखाने की कोशिश थी। ब्रांडेड इमेज के पीछे छिपी थी शातिर ठगी पुलिस की रेड के दौरान घर में प्रशासनिक फाइलें तो नहीं मिलीं, लेकिन दुनिया भर के महंगे ब्रांड्स की भरमार थी। पुलिस के मुताबिक, विप्रा की ड्रेसिंग टेबल पर रखे चैनल और डियोर के महंगे कॉस्मेटिक्स और अलमारी में सजे जिमी चू के सेंडिल उसकी फर्जी पहचान को असली दिखाने के हथियार थे। वह जानती थी कि अगर वह कॉलोनी के दूसरे अधिकारियों जैसी हाई-फाई नहीं दिखेगी, तो लोग उसकी बातों पर यकीन नहीं करेंगे। पुलिस अब उन शोरूम्स का डेटा निकाल रही है, जहां से यह सारा कीमती सामान खरीदा गया था। कुल्फी वाले और कामवाली को भी नहीं छोड़ा पड़ोस में रहने वाले रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि कैसे विप्रा ने अपने इसी रॉयल ठाठ का झांसा देकर घर की बाई और बाहर कुल्फी बेचने वाले तक को लूट लिया। उन मासूमों को लगा कि इतने बड़े घर में रहने वाली मैडम भला उनका पैसा क्यों मारेंगी। पुलिस का कहना है कि विप्रा का यह आलीशान बंगला दरअसल एक हनी ट्रैप की तरह था, जिसकी चमक देखकर बेरोजगार खुद-ब-खुद खिंचे चले आते थे। आज उसी कोठी पर ताला है और उसका सारा लक्जरी तामझाम अब कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश होगा। हायर एजुकेशन के बाद भी चुनी जुर्म की राह तीनों बहनों का प्रोफाइल किसी को भी हैरान कर सकता है। मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा पीएचडी होल्डर है और इंग्लिश व हिस्ट्री में डबल एमए कर चुकी है। उसकी सगी बहन शिखा शर्मा (40) भी एमए पास है और पूरी साजिश में बराबर की हकदार थी। वहीं, उनकी ममेरी बहन दीक्षा पाठक (32) बीएससी ग्रेजुएट है, जो पीड़ितों को फंसाने के लिए ‘हनी ट्रैप’ जैसा जाल बुनती थी और लोगों को अपनी बहन के पास लेकर आती थी। सामान्य परिवार की बेटियों ने बनाया ‘क्राइम सिंडिकेट’ विप्रा के पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा के सामने ही यह पूरा खेल चल रहा था। एक साधारण परिवार की इन बेटियों ने मिलकर एक ऐसा ‘क्राइम सिंडिकेट’ बनाया जिसमें काम बंटा हुआ था। दीक्षा शिकार ढूंढती थी, शिखा माहौल बनाती थी और विप्रा फर्जी अधिकारी बनकर ‘फाइनल डील’ करती थी। इनके पास से बरामद महिंद्रा XUV 700 और आईफोन इनके इसी आलीशान जीवन की गवाही दे रहे हैं, जो इन्होंने दूसरों की गाढ़ी कमाई लूटकर बनाई थी। फिल्मी है तीनों बहनों की ये कहानी पुलिस के मुताबिक, विप्रा शर्मा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 2016 में पीसीएस प्री क्वालीफाई करने के बाद उसकी शादी हुई, लेकिन 2020 में तलाक हो गया। अकेलेपन और नाकामयाबी ने उसे इतना कुंठित कर दिया कि उसने फर्जी एडीएम बनने का नाटक शुरू किया। वह बाकायदा गाड़ी पर नीली बत्ती और उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर चलती थी। असली रुतबा देख चढ़ा फर्जी IAS बनने का जुनून विप्रा शर्मा पुत्री वीरेंद्र कुमार शर्मा निवासी ग्रेटर ग्रीन पार्क थाना बारादरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 35 वर्षीय विप्रा शर्मा ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने प्रयागराज में सिविल सर्विसेज की तैयारी की थी। उसने पुलिस को बताया कि पीसीएस प्री में उसका चयन भी हो गया था। इस बीच उसे वहीं से पता चला कि IAS का कितना रुतबा होता है। अधिकारियों की कार्यशैली को उसने नजदीक से समझा और उसके बाद वह यह हजम नहीं कर सकी कि वह खुद IAS नहीं बन सकी। उसने पहले एक ब्लैक कलर की कार ली, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार और एसडीएम लिखवाया। उसके बाद उसने एक XUV कार ली जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ एडीएम एफआर लिखवाया। इसके बाद वह पूरे रुतबे के साथ रहने लगी और लोगों को लगा कि वह वाकई एक IAS अफसर है।

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