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रॉयल एस्टेट ग्रुप से जुड़े कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सुराग मिले हैं। ग्रुप के निदेशक परवीन कंसल और नीरज कंसल से लगातार दो दिन चली पूछताछ के दौरान गमाडा से जुड़े दो पूर्व तहसीलदारों के नाम सामने आए हैं। इसके बाद ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए गमाडा के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार ईडी को संदेह है कि चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मंजूरियों में नियमों को दरकिनार कर कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रियल एस्टेट परियोजनाओं को लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी जल्द ही संबंधित अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। परवीन-नीरज कंसल से 200 सवाल: – अधिकारियों और ग्रुप के बीच लेनदेन के सबूत मिले सूत्रों के मुताबिक ईडी को रॉयल एस्टेट ग्रुप और गमाडा अधिकारियों के बीच वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम दस्तावेज और बैंक ट्रेल मिले हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ग्रुप से जुड़े खातों से किन अधिकारियों तक पैसा पहुंचा और इसके बदले में क्या लाभ दिए गए। इन बैंक ट्रांजेक्शनों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। साथ ही ईडी ने गमाडा से पिछले पांच वर्षों में जारी सभी सीएलयू मंजूरियों का रिकॉर्ड भी तलब किया है। 32.67 करोड़ बाउंस चेक की जांच जांच एजेंसी 32.67 करोड़ रुपए के बाउंस चेक मामले को भी जांच के दायरे में लेकर चल रही है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। ईडी यह भी जांच रही है कि कथित अनियमितताओं से सरकार को कितना वित्तीय नुकसान हुआ। एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच यह पूरा मामला पंजाब पुलिस द्वारा 19 जुलाई 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। एफआईआर में सीआरसीपीएल के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों पर धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
रॉयल एस्टेट घोटाला, गिरफ्तार प्रमोटर का खुलासा:गमाडा के पूर्व तहसीलदारों के नाम सामने आए, CLU मंजूरियों और करोड़ों के लेनदेन की जांच
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