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दो साल की उम्र में पोलियो से ग्रस्त होकर चलने-फिरने में कठिनाइयों का सामना करने वाले बिहार के सावन कुमार ने अपनी मेहनत और संकल्प से सफलता की नई मिसाल पेश की है। समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर गांव के निवासी सावन ने जेईई एडवांस परीक्षा में पीडब्ल्यूडी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 22, ओबीसी एनसीएल पीडब्ल्यूडी रैंक 9 तथा कॉमन रैंक 17532 प्राप्त की है। अब वह आईआईटी में एडमिशन के लिए जोसा काउंसलिंग में भाग ले रहा है। सावन ने कोटा में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। जेईई मेन में उन्होंने 99.14 पर्सेंटाइल स्कोर हासिल किया था। उनकी प्रतिभा और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कोचिंग संस्थान में फीस में 80 प्रतिशत छूट मिली। सावन जब दो साल के थे, तब पोलियो की चपेट में आ गए। इसके कारण उनके दोनों पैरों में लगभग 70 प्रतिशत लोकोमोटर डिसएबिलिटी विकसित हो गई। आज भी उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है लेकिन उन्होंने कभी अपनी शारीरिक स्थिति को सफलता के रास्ते नहीं आने दिया। किसान परिवार से निकलकर बनाई सफलता की राह
सावन एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता प्रभु राय के पास खुद की खेती की जमीन नहीं है। वे बंटाई पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और सावन को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। सावन की प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में हुई। बाद में चयन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर उन्होंने बिहार के सिमुलतला आवासीय स्कूल, जमुई में कक्षा 6 से 10 तक निशुल्क शिक्षा हासिल की। कक्षा 10 की बिहार बोर्ड परीक्षा में राज्य की मेरिट सूची में 10वां स्थान हासिल करने के बाद परिवार ने उन्हें इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा भेजा। आईआईटी में कंप्यूटर साइंस और आगे सिविल सेवा का लक्ष्य
सावन का लक्ष्य आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली या आईआईटी मद्रास में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना है। भविष्य में वे सिविल सेवा में जाकर समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्ग की सेवा करना चाहते हैं। सावन का कहना है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी को कमजोरी नहीं बनने देना चाहिए। शिक्षा व्यक्ति को सशक्त बनाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और कोटा में शिक्षकों के सहयोग को दिया है।
दो साल की उम्र में पोलियो, अब आईआईटी जाएगा सावन:बंटाई पर खेती करते हैं पिता, आर्थिक परेशानियां भी थी, जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी एआईआर-22 हासिल की
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