दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री को विधानसभा में दी गई श्रद्धांजलि:विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने किया नमन, स्वतंत्रता संग्राम और जनसेवा में योगदान को किया याद

Actionpunjab
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दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश की 108वीं जयंती पर विधानसभा परिसर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने चौधरी ब्रह्म प्रकाश के स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र और जनसेवा में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक ओम प्रकाश शर्मा, राजकुमार भाटिया तथा चौधरी ब्रह्म प्रकाश के परिजन और अन्य रिश्तेदार भी उपस्थित रहे। इस मौके पर विजेंद्र गुप्ता ने कहा चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने कम आयु में ही स्वयं को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक पद या व्यक्तिगत लाभ की आकांक्षा के ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा सार्वजनिक जीवन में उनका प्रवेश एक भावी मुख्यमंत्री या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए समर्पित युवा सेनानी के रूप में हुआ था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उनके योगदान का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने सादगी और सिद्धांतों पर आधारित जीवन जीते हुए दिल्ली के विकास, किसानों के कल्याण और राष्ट्रीय मुद्दों के समाधान के लिए निरंतर कार्य किया। सत्ता के उच्च पदों पर रहते हुए भी उन्होंने अपने आदर्शों और जनहित के मुद्दों से कभी समझौता नहीं किया। नेहरू की नीतियों से असहमति जताने में भी नहीं किया संकोच: विजेंद्र विजेंद्र गुप्ता ने कहा तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का राष्ट्रीय राजनीति में अत्यंत प्रभावशाली स्थान था, लेकिन चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने दिल्ली और उसके नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक होने पर अपनी असहमति खुलकर व्यक्त की। उन्होंने कभी भी अपनी बात रखने में संकोच नहीं किया। उनके सार्वजनिक जीवन में जनता के प्रति जवाबदेही और उत्तरदायित्व की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। आपातकाल के दौरान 19 महीने जेल में रहे, लोकतंत्र के लिए किया संघर्ष विधानसभा अध्यक्ष ने आपातकाल के दौरान चौधरी ब्रह्म प्रकाश के संघर्ष और त्याग को भी याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक आपातकाल के समय चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने 19 महीने तक जेल में रहकर कठिन यातनाएं झेलीं। यह बलिदान लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रताओं और जनसेवा के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश का जीवन आज भी जनप्रतिनिधियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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