हरिद्वार में 5210 किलो के पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा:4.5 फीट ऊंचा और 3333 किलो पारे से बना, 10 साल की रिसर्च के बाद तैयार हुआ

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धर्मनगरी हरिद्वार में बुधवार, 17 जून को 5210 किलो वजनी पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसे ‘पारद ध्यान लिंगम’ नाम दिया गया है। ट्रस्ट के मुताबिक, यह एशिया के सबसे बड़े और सबसे भारी पारद शिवलिंगों में से एक है। इसमें 3333 किलो शुद्ध पारे का इस्तेमाल किया गया है। यह शिवलिंग हरिद्वार-दिल्ली स्टेट हाईवे पर भादराबाद टोल प्लाजा के पास स्थित श्री साई शिव गंगा धाम, शिर्डी साई बाबा मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। बुधवार सुबह सूर्योदय के शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रों और विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई। 4.5 फीट ऊंचा शिवलिंग, वजन करीब 5.2 टन आयोजकों के मुताबिक, शिवलिंग की कुल ऊंचाई 4.5 फीट है। इसकी चौड़ाई करीब 1.5 फीट है। कुल वजन 5210 किलो है। इसमें 3333 किलो शुद्ध पारा है। पारा सामान्य रूप से तरल धातु माना जाता है, इसलिए इसे स्थिर और ठोस आकार में तैयार करना इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती रहा। ट्रस्ट का दावा है कि इस शिवलिंग को तैयार करने में आधुनिक हानिकारक केमिकल या मिलावट का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसे प्राचीन भारतीय रसायन शास्त्र, नाथ योगी परंपरा और लंबे वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। पुणे के ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी के मार्गदर्शन में बना इस पारद शिवलिंग का निर्माण पुणे के हीलिंग गुरु और गिरनार के ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी के नेतृत्व में हुआ। आयोजकों के मुताबिक, पारे को बांधकर इस स्वरूप में लाने के लिए करीब 10 साल तक रिसर्च और प्रयोग किए गए। इस काम में भारत के सुपर कंप्यूटर के जनक पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर और पीर योगी महंत सोमनाथ बाप्पू का मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिला। प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्थापना प्राचीन भारतीय विज्ञान और अध्यात्म के मेल का उदाहरण है। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती सहित संत और राजनेता बने हिस्सा प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी, जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि और साध्वी ऋतंभरा सहित देशभर के संत-महंत, राजनेता, कॉर्पोरेट जगत से जुड़े लोग और श्रद्धालु भी मौजूद रहे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्य अतिथि के रूप में न्योता दिया गया था। कार्यक्रम में इस पूरी परियोजना को श्री शिर्डी साई समर्थ ट्रस्ट के ट्रस्टी राजीव बंसल के सहयोग से पूरा किया गया है। आयोजन की देखरेख में उत्तराखंड के आईजी अनंत तावकेले और तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी शंकर जीवाल की भी भूमिका रही। इंडिया और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम, अब गिनीज के लिए प्रक्रिया ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक, शिवलिंग के वजन, आकार और निर्माण पद्धति के आधार पर इसे इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। अब इसे दुनिया के सबसे बड़े पारद शिवलिंग के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आयोजकों का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह स्थान शिव भक्तों, साधकों और ध्यान करने वाले लोगों के लिए बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बन सकता है।

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