Nirjala ekadashi significance in hindi, rituals about nirjala ekadashi, vishnu puja tips

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8 घंटे पहले

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ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी निर्जला एकादशी आज (25 जून) है। इस बार ये व्रत गुरुवार को पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है, क्योंकि गुरुवार को भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने की परंपरा है और एकादशी व्रत भी विष्णु जी के निमित्त ही किया जाता है। निर्जला एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशियों में से एक माना जाता है। जो भक्त ये व्रत विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करते हैं, उन्हें भगवान की कृपा से सुख-समृद्धि मिलती है, ऐसी मान्यता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, निर्जला एकादशी पर निर्जल व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्य मिलता है। इस दिन घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष शृंगार करना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम, तुलसी पूजन, भजन और रात्रि जागरण भी कर सकते हैं। निर्जला एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य अध्याय में सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया गया है। जानिए सुख-समृद्धि की कामना से गुरुवार और एकादशी के योग में कौन-कौन से 10 शुभ काम किए जा सकते हैं…

गुरुवार को एकादशी होने से इस दिन भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। गणेश पूजा के बाद भगवान का जल-दूध से अभिषेक करना चाहिए। जल चढ़ाने के बाद दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और फिर भगवान की प्रतिमा पर शंख से दूध चढ़ाएं। दूध के बाद भगवान को शुद्ध जल अर्पित करें। लाल-पीले चमकीले वस्त्र और हार-फूल से लक्ष्मी-विष्णु का श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। चावल, चंदन, अबीर, गुलाल चढ़ाएं। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। माखन, मिश्री और मिठाई का भोग तुलसी के पत्तों के साथ लगाएं। कर्पूर जलाकर भगवान की आरती करें।

  • दूसरा काम

भगवान विष्णु की पूजा में एकादशी व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहें। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे फलाहार कर सकते हैं, फलों का रस पी सकते हैं। वैसे ये व्रत निर्जला किया जाता है यानी भक्त पूरे दिन और द्वादशी की सुबह तक अन्न-जल का त्याग करते हैं। इसी वजह से यह व्रत एक तपस्या की तरह है। इतना कठिन व्रत न कर पाएं, तो सामान्य नियमों के साथ भी एकादशी व्रत कर सकते हैं। स्वास्थ्य कारणों से या किसी अन्य वजह से अगर व्रत न कर पाएं, सिर्फ भगवान की पूजा भी कर सकते हैं।

  • तीसरा काम

गुरुवार और एकादशी के योग में देवगुरु बृहस्पति की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। ज्योतिष में गुरु ग्रह को गुरुवार का कारक ग्रह माना जाता है। इस ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें, पीले फूल चढ़ाएं, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं और ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः मंत्र का जप करें।

दिन की शुरुआत में भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें। लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम, चावल और लाल फूल डालें। इसके बाद ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए सूर्य को जल अर्पित करें।

  • पांचवां काम

घर में विराजित बाल गोपाल की विशेष पूजा करें। बाल गोपाल को जल, दूध और फिर जल चढ़ाएं। नए लाल-पीले वस्त्र और फूलों से श्रृंगार करें। भगवान को इत्र लगाएं। चंदन से तिलक लगाएं। धूप-दीप जलाएं, माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

सुबह-शाम पूजा करें और दिन में जब समय मिले, तब भगवान विष्णु के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। आप चाहें तो ऊँ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णु प्रचोदयात्, इस मंत्र का जप भी कर सकते हैं।

  • सातवां काम

एकादशी की शाम सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। परिक्रमा करें। ध्यान रखें, तुलसी को स्पर्श न करें। दूर से ही पूजा करे। सूर्यास्त के बाद तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

  • आठवां काम

एकादशी की सुबह भगवान शिव और देवी पार्वती का विधिवत पूजा करें। शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं। चंदन का लेप करें। देवी पार्वती को लाल वस्त्र अर्पित करें। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाएं और मिठाई का भोग लगाएं।

किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें।

  • दसवां काम

एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, जूते-चप्पल और कपड़ों का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें। अभी गर्मी का समय है तो जल का दान भी कर सकते हैं। भक्तों को पीने के लिए फलों का रस दे सकते हैं।

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