हरिशचंद्र सिंह जसोल बोले- लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लें:लोकतंत्र सेनानियों को किया नमन, कहा- उनके साहस और त्याग ने लोकतंत्र को नई ऊर्जा दी

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राजस्थान भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हरिशचंद्र सिंह जसोल ने ‘संविधान हत्या दिवस’ पर लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसने देश को लोकतांत्रिक अधिकारों के महत्व का गहरा संदेश दिया। इस दिन मध्यरात्रि में आपातकाल लागू होने के साथ ही देशभर में हजारों लोकतंत्र सेनानियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई, प्रेस पर सेंसरशिप लागू हुई और कई समाचार पत्रों की बिजली काट दी गई। समाचारों के प्रकाशन पर सरकारी नियंत्रण स्थापित होने से पूरे देश में भय और अनिश्चितता का वातावरण व्याप्त हो गया था। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, चौधरी चरण सिंह, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, राजमाता गायत्री देवी और राज नारायण सहित अनेक लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखा। उनके साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प ने देश में लोकतंत्र को नई ऊर्जा प्रदान की। यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत स्थापित हुआ। जसोल ने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ प्रत्येक नागरिक को यह संदेश देता है कि संविधान की गरिमा, लोकतंत्र की मर्यादा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति सदैव जागरूक और प्रतिबद्ध रहना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति जनभागीदारी, संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और नागरिक चेतना में निहित है। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सभी लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि उनका योगदान राष्ट्र के इतिहास में सदैव स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक सशक्त, जागरूक और समृद्ध भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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