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नई दिल्ली46 मिनट पहले
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20 अगस्त 2025 को गृह मंत्री अमित शाह ने इससे जुड़े 3 बिल लोकसभा में बिल पेश किए थे। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर हंगामा किया था।
अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री किसी गंभीर अपराध के मामले में गिरफ्तार होने के बाद लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है। इससे जुड़े बिलों को सरकार मानसून सत्र में दोबारा पेश कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक 130वें संविधान संशोधन बिल पर बनी संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) इससे जुड़े प्रावधानों को हटाने के पक्ष में नहीं है। समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है।
गृहमंत्री अमित शाह ने इससे जुड़े 3 बिलों को पिछले मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों में रखा था, जिसके बाद इसे इन्हें JPC को भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया था।

इस प्रस्तावित कानून से जुड़े सवालों के जवाब-
1.मामला क्या है?
130वें संविधान संशोधन विधेयक में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों को लेकर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) अपनी रिपोर्ट को 17 जुलाई को मंजूरी दे सकती है।
2.130वें संविधान संशोधन विधेयक में प्रस्तावित कानून क्या कहता है?
130वें संविधान संशोधन विधेयक के मुताबिक अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य मंत्री किसी गंभीर अपराध (जिसमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान है) के मामले में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है।
3. क्या सिर्फ गिरफ्तारी होते ही पद छिन जाएगा?
नहीं। सिर्फ गिरफ्तारी से पद नहीं जाएगा। प्रस्तावित प्रावधान तभी लागू होगा, जब व्यक्ति लगातार 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहे।
4. क्या यह हर मामले में लागू होगा?
नहीं। यह केवल उन मामलों में लागू होगा, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। छोटे अपराध इसके दायरे में नहीं होंगे।
5. सरकार इस कानून की जरूरत क्यों बता रही है?
सरकार का कहना है कि इससे सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही बढ़ेगी। उनका तर्क है कि गंभीर आरोपों में लंबे समय तक जेल में रहने वाला व्यक्ति मंत्री पद पर बना रहे, यह लोकतांत्रिक नैतिकता के खिलाफ है।

7. आगे क्या होगा?
अभी यह सिर्फ प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक है। यदि 17 जुलाई को JPC से मंजूरी मिलती है तो इसे लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इसके बाद अगर बिल दोनों सदनों से पास हो जाता है तो यह कानून बन सकेगा।
8. क्या बिल का दुरुपयोग हो सकता है?
नहीं। JPC रिपोर्ट में ऐसे सुरक्षा उपाय जोड़ सकती है, जिससे राजनीतिक बदले की भावना से झूठे मामलों में गिरफ्तारी कर किसी सरकार को अस्थिर करने के लिए इस कानून का दुरुपयोग न हो।
9. क्या बिल को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके पटनायक के मुताबिक प्रस्तावित बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी सकती है।
CBI-ED ने 2014 के बाद 13 सिटिंग मंत्रियों को गिरफ्तार किया
2014 के बाद कम से कम 13 सिटिंग मंत्रियों को CBI-ED गिरफ्तार कर चुकी हैं। इनमें से 10 गिरफ्तारियां PMLA के कड़े प्रावधानों के तहत हुईं। ज्यादातर गिरफ्तारियां AAP शासित दिल्ली और TMC शासित पश्चिम बंगाल में हुईं।
किसी भाजपाई मंत्री की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सिर्फ उत्तर प्रदेश के मंत्री राकेश सचान को अवैध हथियार के मामले में एक वर्ष की सजा हुई थी। वह जमानत के बाद पर बने रहे।
केजरीवाल ने गिरफ्तारी के 6 महीने बाद भी इस्तीफा नहीं दिया, 3 केस से समझिए पूरे मामले को

अरविंद केजरीवाल पहली बार 21 मार्च से 10 मई 2024 तक और दूसरी बार 2 जून 2024 से 13 सितंबर 2024 तक तिहाड़ जेल में बंद रहे। उन्होंने 17 सितंबर को दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दिया था।
- केंद्र सरकार का मानना है कि ये तीनों बिल लोकतंत्र और सुशासन की साख मजबूत करेंगे। अब तक संविधान के तहत केवल दोषी ठहराए गए जनप्रतिनिधियों को ही पद से हटाया जा सकता था। मौजूदा कानूनों में संवैधानिक पद पर बैठे नेताओं को हटाने को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। इसको लेकर कानूनी और सियासी विवाद होते रहे हैं।
- दिल्ली के तत्कालीन CM अरविंद केजरीवाल शराब नीति केस केस में ED की गिरफ्तारी के बाद भी पद पर थे। जमानत के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया था।
- तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी भी 241 दिन जेल में रहते हुए मंत्री रहे थे, बालाजी को मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MTC) में नौकरी के बदले नकद घोटाले के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जून 2023 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। इसके बाद भी वह 13 फरवरी 2024 तक पद पर बने रहे थे। गिरफ्तारी से पहले वे बिजली, आबकारी और मद्य निषेध विभाग संभाल रहे थे। गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने उन्हें “बिना विभाग वाला मंत्री” बनाए रखा और उनके विभाग अन्य सहयोगियों को सौंप दिए।

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