मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अब बाकी बचे अगस्त और सितंबर में अल-नीनो का प्रभाव दिखाई देगा। मॉनसून ट्रफ हिमालयी इलाके में स्थिर हो गई है। इस वजह से पहाड़ों में मूसलाधार बारिश होगी लेकिन मैदानी इलाके बारिश को तरस जाएंगे।
अगस्त महीने में लगभग 15 दिन देश के बड़े हिस्से में झमाझम बारिश हुई। हालांकि अब मॉनसून कमजोर होने लगा है। चिंता की बात यह है कि जब मॉनसून पूरे चरम पर होना चाहिए, तभी यह कमजोर पड़ने लगा। मौसम विज्ञानियों ने पहले भी अल-नीनो की चेतावनी जारी की थी और कहा था कि इस बार बारिश कम होगी। इसका असर अब देखने को मिलेगा। अगले दो सप्ताह यानी 2 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बेहद कम रहेंगी। मौसम विभाग के मुताबिक पहले से भी 14 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं आने वाले समय में मॉनसून बेहद कमजोर हो जाएगा। इससे फसलें भी प्रभावित होंगी। वहीं उमस की वजह से सितंबर के महीने में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
अभी कहां हो सकती है भारी बारिश
मॉनसून ट्रफ हिमालय के निचले इलाकों में स्थिर हो गई है। मॉनसून कमजोर होने की वजह से खरीफ की फसलों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग की मानें तो हिमलायी बेल्ट और पूर्वोत्तर के राज्यों में अब भी भारी बारिश हो सकती है। उत्तरी बंगाल की खाड़ी के पास कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटे में बन सकताहै। इस वजह से ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से भारी बारिश का अनुमान है।
क्यों कमजोर हो गया मॉनसून
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक असली समस्या मॉनसून ट्रफ ही है। मौसम के जानकार नवदीप दहिया ने बताया, मॉनसून ट्रफ के स्थिर होने का असर यह होगा कि मध्य भारत और बाकी हिस्से में बारिश की गतिविधियां कम हो जाएंगी। वहीं हिमालयी इलाके में ही मसूलाधार बारिश होगी। ऐसे में पहाड़ों में आपदा आएगी और बाकी का देश बारिश के लिए तरस जाएगा। अगस्त और सितंबर के महीने में मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा बारिश की जरूरत होती है। हालांकि इसका उलटा होने की उम्मीद है।
सोमवार को स्काइमेट ने भी अपनी भविष्यवाणी नमें बताया कि सितंबर में सूखे की 70 फीसदी आशंका बन गई है। लॉन्ग पीरियड एवरेज बारिश में 85 फीसदी की कमी आ सकती है। स्काइमेट ने भी कहा है कि अल-नीनो के ताकतवर होने की वजह से हिमद महासागर डाइपोल कमजोर हो रहा है। जानकारों का कहना है कि मॉनसून कमजोर होने की वजह से फसलें दांव पर लगी हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात में अगस्त महीने में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश होगी। ऐसे में दालों, सोयाबीन, मक्का की फसल भी प्रभावित होगी। ब्रिटेन के मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह अल-नीनो पिछले 100 साल का सबसे ताकतवर सिस्टम हो सकता है। इसकी वजह से अगले साल हीटवेव की भी घटनाएं बढ़ जाएंगी।