POCSO Pending Cases; Supreme Court – Priority Basis | Central Govt | सुप्रीम कोर्ट बोला- केंद्र जल्द नए स्पेशल पॉक्सो कोर्ट बनाए: 300 पेंडिंग केस वाले जिलों को प्राथमिकता दें; इनकी कमी से मामले निपटाने में देर हो रही

Actionpunjab
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नई दिल्ली32 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सरकार को निर्देश दिया कि वह बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों से निपटने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर POCSO कोर्ट बनाए।

कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों ने स्पेशल POCSO कोर्ट बनाए हैं, लेकिन तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में केस पेंडेंसी के चलते और ज्यादा कोर्ट बनाए जाने की जरूरत है।

जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट कम होने के कारण मामले की जांच करने के लिए डेडलाइन का पालन नहीं हो पा रहा है।

कोर्ट ने पॉक्सो केस के लिए निर्धारित डेडलाइन के अंदर ट्रायल पूरा करने के अलावा निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।

कोर्ट ने मांगी थी पेंडिंग केस की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी वी गिरी और सीनियर एडवोकेट उत्तरा बब्बर को POCSO कोर्ट की स्थिति पर राज्यवार डीटेल देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने “बाल बलात्कार की घटनाओं की संख्या में खतरनाक वृद्धि” को हाइलाइट करते हुए एक्शन लिया था।

कोर्ट ने राज्य सरकारों से उन जिलों में दो कोर्ट बनाने को कहा जहां POCSO अधिनियम के तहत बाल शोषण के पेंडिंग मामलों की संख्या 300 से ज्यादा है। कोर्ट ने कहा POCSO एक्ट के तहत 100 से ज्यादा FIR वाले हर जिले में एक कोर्ट बनाने के जुलाई 2019 के निर्देश का मतलब था कि डेजिगनेटेड कोर्ट केवल कानून के तहत ऐसे मामलों से निपटेगा।

POCSO के मामलों से जुड़े आंकड़े

  • 2022 में POCSO अधिनियम की धाराओं 4 और 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत 38,444 पीड़ितों को दर्ज किया गया, जिनमें से 38,030 लड़कियाँ और 414 लड़के थे।
  • अक्टूबर 2023 तक कर्नाटक में POCSO अधिनियम के तहत 3000 से ज्यादा केस दर्ज किए गए, जिसमें हर महीने औसतन 200 से ज्यादा मामले सामने आए।
  • जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक, दिल्ली में POCSO के 9,108 केस पेंडिंग थे। यदि नए मामले छोड़ दिए जाएं, तो इन मामलों को निपटाने में 27 साल लग सकते हैं।

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