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सैनी कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 2009 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा नेशनल अवॉर्ड मिला, इसके बाद महाराणा सज्जन सिंह अवॉर्ड (2012), राज्य स्तरीय पुरस्कार (2013), शिल्प गुरु अवॉर्ड (2016) और महाराज भगवंत दास अवॉर्ड (2020) प्राप्त हुए। वे राजस्थान ललित कला अकादमी सहित कई संस्थाओं की ओर से भी सम्मानित हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने आइसलैंड, इस्तांबुल, बोगोटा, न्यू मेक्सिको और देश के विभिन्न शहरों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है। आगरा विश्वविद्यालय में उन पर शोध भी हो चुका है।
}शंख से लेकर ईसर लाट तक; सैनी द्वारा तैयार की गई ब्ल्यू पॉटरी शंख अब वीवीआईपी गिफ्ट बन चुकी है। 17 दिसंबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यही शंख भेंट किया था। अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर जेपी भाजपा अध्यक्ष नड्डा तक, कई दिग्गजों को यह शंख भेंट किया जा चुका है। सैनी अब तक 5000 से अधिक ब्ल्यू पॉटरी शंख बना चुके हैं। वीआईपी के लिए बनने वाला हर शंख करीब 800 ग्राम का होता है।
}हड़प्पा से अजंता तक, कला के रंग हजार; सैनी ने ब्ल्यू पॉटरी को सिर्फ प्लेटों और फूलदानों तक सीमित नहीं रखा। राग-रागिनियों से सजी 13×29 इंच की कलाकृति, 51 इंच ऊंची ‘ईसर लाट’, मुगल शैली का मिनिएचर पेंटिंग से सजा 25 इंच का जालीदार लैम्प, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला। फड़ पेंटिंग, राधा-कृष्ण, बणी-ठणी, ट्री ऑफ लाइफ, अजन्ता-एलोरा के चित्रों को उन्होंने ब्ल्यू पॉटरी के माध्यम से नया जीवन दिया।
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गोपाल सैनी
शिल्प गुरु
जयपुर की प्रसिद्ध ब्ल्यू पॉटरी न सिर्फ एक कला है, बल्कि यह उन रिश्तों की कहानी भी है, जो भरोसे की नींव पर टिके होते हैं। शिल्प गुरु गोपाल सैनी ने इस पारंपरिक हस्तकला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया, लेकिन उनकी इस उड़ान की पहली सीढ़ी बने- उनके दोस्त राम सहाय। साल 1993 था।
गोपाल सैनी के पास हुनर था, लेकिन स्टूडियो बनाने के लिए जमीन और पैसे नहीं थे। तब उनके दोस्त राम सहाय ने दोस्ती की मिसाल कायम करते हुए कहा- जब तक अपना स्टूडियो नहीं बना पाओ, मेरा घर तुम्हारा स्टूडियो है। राम सहाय ने न सिर्फ जगह दी, बल्कि अपने पैसों से स्टूडियो भी बनवाया। उसी दोस्ती को अमर करते हुए गोपाल सैनी ने अपने स्टूडियो का नाम रखा- ‘राम-गोपाल ब्ल्यू पॉटरी स्टूडियो’।